खेल विकास फंड का उपयोग: अधिकारियों के क्लबों में सुविधाओं का निर्माण
न्यू मोती बाग में खेल सुविधाओं का निर्माण
दिल्ली के न्यू मोती बाग रिहायशी क्षेत्र में बने स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट और बैडमिंटन हॉल किसी निजी स्पोर्ट्स क्लब की याद दिलाते हैं। लेकिन इन सुविधाओं के निर्माण के लिए जो धनराशि खर्च की गई, वह उस फंड से आई है, जिसका उद्देश्य देश में खिलाड़ियों को तैयार करना और खेलों का विकास करना है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड से पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये अधिकारियों के आवासीय क्षेत्रों और सिविल सेवा संस्थानों पर खर्च किए गए हैं। यह फंड अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सहायता देने वाली योजनाओं के लिए भी जिम्मेदार है।
खेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच न्यू मोती बाग रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और अन्य संस्थानों को 6.7 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दी गई, जिसमें से 6.2 करोड़ रुपये जारी किए गए।
न्यू मोती बाग कॉम्प्लेक्स को पहले 2019 में 'खेलो इंडिया' योजना के तहत 2.8 करोड़ रुपये मिले थे। इसके बाद, जून 2024 में NSDF से 2.2 करोड़ रुपये और मंजूर किए गए। यह राशि खेल सुविधाओं के उन्नयन के लिए थी।
इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्विमिंग पूल, स्क्वैश कोर्ट, जिम और टेनिस कोर्ट जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन यहां की सदस्यता नियंत्रित है। न्यू मोती बाग रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधांशु पांडे ने कहा कि उन्होंने संसदीय समिति की रिपोर्ट नहीं पढ़ी है।
पांडे ने बताया कि आरडब्ल्यूए ने इस प्रोजेक्ट के लिए NBCC को नियुक्त किया था। उन्होंने कहा कि यह सरकार का काम है कि वह फंड का उपयोग कैसे करती है।
सुधांशु पांडे ने कहा कि ये सुविधाएं कॉलोनी के निवासियों और अन्य सरकारी अधिकारियों के लिए उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक खेल प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न खेल शामिल थे।
जब उनसे पूछा गया कि खिलाड़ियों के लिए बने फंड से पैसे निकालने का औचित्य क्या है, तो पांडे ने कहा कि आवासीय कॉलोनियों का विकास भी सरकार की जिम्मेदारी है।
जांच में यह भी सामने आया कि केवल रिहायशी कॉलोनियों को ही नहीं, बल्कि अधिकारियों के संस्थानों को भी NSDF से सहायता मिली है।
यह खर्च उस समय हुआ जब NSDF में योगदान लगातार घट रहा था। रिकॉर्ड के अनुसार, 2023-24 में फंड में 85.26 करोड़ रुपये का योगदान मिला था, जो 2025-26 में घटकर 37.02 करोड़ रुपये रह गया।
अगस्त 2025 में लोकसभा में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि खेल फंड का उपयोग रिहायशी कॉलोनियों के लिए नहीं होना चाहिए। समिति ने NSDF के उपयोग पर अधिक निगरानी की आवश्यकता बताई।
एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए NSDF का उपयोग 'अनैतिक' है, खासकर जब ये सुविधाएं आम जनता के लिए पूरी तरह खुली नहीं हों।
