असित सेन: हिंदी सिनेमा के अनोखे हास्य कलाकार की कहानी
असित सेन का गोरखपुर कनेक्शन
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जब भी अनोखी कॉमेडी का नाम लिया जाता है, असित सेन का नाम अवश्य आता है। उनकी धीमी आवाज, सुस्त संवाद अदायगी और मासूमियत से भरे चेहरे ने दर्शकों को हमेशा हंसाया। उनका गहरा संबंध उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से था। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पहचान किसी एक्टिंग स्कूल से नहीं, बल्कि घर के एक नौकर की नकल से बनी।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
असित सेन का जन्म 13 मई 1917 को गोरखपुर में हुआ। आज उनकी 108वीं जयंती है। उनके परिवार की जड़ें पश्चिम बंगाल के बर्दवान में थीं। उनके पिता का गोरखपुर में व्यवसाय था, लेकिन असित का मन व्यापार में नहीं लगता था। उन्हें फोटोग्राफी का शौक था, जिसके चलते उन्होंने गोरखपुर में अपना फोटो स्टूडियो खोला।
बिमल रॉय से मुलाकात
हालांकि, असित सेन का सपना फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना था। बिना परिवार को बताए, वह कलकत्ता पहुंचे और न्यू थिएटर्स से जुड़े। वहां उनकी मुलाकात प्रसिद्ध फिल्म निर्माता बिमल रॉय से हुई, जिन्होंने उनकी जिंदगी को नया मोड़ दिया। बिमल रॉय ने उन्हें अपनी टीम में असिस्टेंट के रूप में रखा।
कॉमिक रोल में पहचान
असित सेन ने 1960 में एक इंटरव्यू में बताया कि बिमल रॉय से मिलने के बाद उनकी जिंदगी में बदलाव आया। उन्होंने अपने घर के पुराने नौकर की नकल करके कॉमिक रोल में पहचान बनाई। उनका अनोखा बोलने का अंदाज दर्शकों को भा गया और वह कॉमेडी रोल्स के लिए फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बन गए।
निर्देशक के रूप में सफलता
असित सेन केवल एक शानदार कॉमेडियन नहीं थे, बल्कि एक सफल निर्देशक भी थे। उन्होंने 'खामोशी', 'सफर' और 'ममता' जैसी यादगार फिल्मों का निर्देशन किया। अभिनेता के रूप में उन्होंने लगभग 250 फिल्मों में काम किया।
अंतिम दिन
1993 में अपनी पत्नी के निधन के बाद असित सेन टूट गए थे। कुछ महीनों बाद, 18 सितंबर 1993 को उन्होंने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज भी उनका अनोखा कॉमिक अंदाज हिंदी सिनेमा में सबसे यादगार शैलियों में से एक माना जाता है।
