Bharat NCAP की 5-स्टार रेटिंग: क्या है असली सच?

नई कार खरीदते समय 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग पर भरोसा करना आम बात है, लेकिन हाल ही में एक RTI खुलासे ने इस प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। क्या ये रेटिंग केवल एक बार के टेस्ट पर निर्भर करती है? जानें Bharat NCAP के तहत किए गए क्रैश टेस्ट और रीटेस्ट की प्रक्रिया के बारे में। क्या यह प्रणाली विश्वसनीय है? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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5-स्टार सेफ्टी रेटिंग पर सवाल

आजकल नई कार खरीदते समय ग्राहक 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग पर सबसे अधिक भरोसा करते हैं। कंपनियां अपने लॉन्च इवेंट में इस रेटिंग को प्रमुखता से पेश करती हैं, जिससे ग्राहकों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वाहन पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन हाल ही में एक RTI खुलासे ने इस प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ये रेटिंग केवल एक बार के टेस्ट पर निर्भर करती है, या इसके पीछे कोई और प्रक्रिया भी है?


Bharat NCAP के तहत क्रैश टेस्ट

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से प्राप्त RTI जानकारी के अनुसार, भारत में Bharat NCAP के तहत अब तक 35 कार मॉडलों का क्रैश टेस्ट किया जा चुका है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सभी वाहनों को स्वयं ऑटोमोबाइल कंपनियों ने टेस्टिंग के लिए भेजा था। सरकार ने अब तक किसी भी कार को सीधे टेस्ट के लिए नहीं चुना है, जबकि नियमों के अनुसार, सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी भी वाहन को टेस्ट के लिए नामांकित कर सकती है।


कौन सी कारों का हुआ रीटेस्ट?

RTI में यह भी बताया गया है कि कुछ गाड़ियों की फाइनल सेफ्टी रेटिंग जारी होने से पहले दोबारा टेस्ट या रीअसेसमेंट किया गया। इनमें शामिल हैं:



  • मारुति सुजुकी डिजायर

  • टाटा पंच

  • टाटा सिएरा

  • टाटा कर्व

  • महिंद्रा XUV 3XO

  • महिंद्रा XUV400 EV

  • महिंद्रा BE 6


इन सभी वाहनों को बाद में Bharat NCAP में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग प्राप्त हुई।


रीटेस्ट की प्रक्रिया

मंत्रालय के अनुसार, यह प्रक्रिया AIS197 नियमों के तहत की जाती है। इसके क्लॉज 6.2 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि किसी टेस्ट में डेटा अधूरा हो, आवश्यक पैरामीटर गायब हों या परिणाम मानकों से मेल न खाएं, तो रीटेस्ट या रीअसेसमेंट किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि गाड़ी फेल हुई है, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि अंतिम परिणाम पूरी तरह से सही और वैज्ञानिक रूप से मजबूत हो।


क्या यह प्रणाली पर सवाल उठाती है?

इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 5-स्टार रेटिंग केवल एक बार के क्रैश टेस्ट का परिणाम है या इसके पीछे कई चरणों की प्रक्रिया होती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर के सेफ्टी प्रोग्राम्स में रीअसेसमेंट एक सामान्य प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य गलतियों को सुधारना और टेस्ट डेटा को अधिक सटीक बनाना है।