सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची में नाम हटाने के आरोपों पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची में नाम हटाने के आरोपों पर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। अदालत ने दावे और आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया है। अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी, जहां इस मुद्दे पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख


नई दिल्ली। महाराष्ट्र की मतदाता सूची में नाम हटाने के आरोपों के चलते सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने दावे और आपत्तियों को दर्ज कराने की समयसीमा बढ़ाने या अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच नवंबर की तारीख तय की है.


याचिका की पृष्ठभूमि

यह याचिका अरुण आनंदगिरि द्वारा दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र की मतदाता सूची के मसौदे से नाम हटाने और दोबारा नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया गंभीर चिंता का विषय है। याचिका में इस प्रक्रिया की समीक्षा करने और प्रभावित मतदाताओं को राहत देने की मांग की गई है.


अधिवक्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी. दातार ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र में लगभग नौ करोड़ मतदाता हैं। उनके अनुसार, मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद लगभग 33 प्रतिशत यानी करीब तीन करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप है। उन्होंने यह भी दावा किया कि लगभग 1.22 करोड़ नामों को कथित तौर पर तार्किक विसंगतियों के आधार पर सूची से हटाया गया है.


फॉर्म-6 पर आपत्ति

वरिष्ठ अधिवक्ता ने विशेष रूप से फॉर्म-6 के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह फॉर्म सामान्यतः नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए निर्धारित है, जबकि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनमें पहले से पंजीकृत मतदाता भी शामिल हैं। ऐसे लोगों से फॉर्म-6 भरवाने पर व्यावहारिक और कानूनी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.


अगली सुनवाई की तैयारी

सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आश्वस्त किया कि इस प्रक्रिया के कारण किसी को भी मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की गई। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि अन्य राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान समयसीमा बढ़ाई गई थी।


महाराष्ट्र में मतदाता सूची का मसौदा

महाराष्ट्र में संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची का मसौदा 31 अगस्त को प्रकाशित किया गया था। इसके बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ाकर 26 अक्टूबर तक कर दी गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर तक जारी रहेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जानी है.


सुप्रीम कोर्ट का पूर्व निर्णय

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया संचालित करने के चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखा था। अदालत ने माना था कि मतदाता सूची में संशोधन करना चुनाव आयोग की संवैधानिक और कानूनी शक्तियों के दायरे में आता है।