पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: SIR के प्रभाव और परिणामों का विश्लेषण
SIR का मुद्दा और वोटिंग पर प्रभाव
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। राज्यभर में लाखों मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर हो गए हैं, और इनमें से अधिकांश लोग विभिन्न कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है और कई सीटों पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं। चुनाव परिणाम दर्शाते हैं कि जहां SIR के तहत वोट कटने की घटनाएं हुईं, वहां बीजेपी को बड़ा लाभ मिला। हालांकि, जिन क्षेत्रों में वोट कम कटे, वहां भी बीजेपी को भारी मत मिले हैं, जिससे उनकी जीत का अंतर काफी बड़ा रहा।
मतदाता सूची से बाहर होने वाले
SIR के कारण लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। कई चुनाव अधिकारी भी ऐसे थे जिनके नाम लिस्ट से गायब थे, जबकि वे चुनावी ड्यूटी पर तैनात थे। लाखों मतदाता जिन्होंने ट्राइब्यूनल में अपील की, उनमें से कुछ ही को राहत मिली है और उनके नाम अंतिम समय में लिस्ट में जोड़े गए। दिलचस्प बात यह है कि जिन सीटों पर वोट कटने की घटनाएं अधिक हुईं, वहां मतदान का प्रतिशत भी काफी ऊंचा रहा। इसे इस दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है कि केवल वास्तविक मतदाता ही बचे हैं, क्योंकि कई नाम डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित हो चुके थे।
आंकड़ों का विश्लेषण
एक रिपोर्ट के अनुसार, जिन 169 सीटों पर 25 हजार से अधिक वोट कटे, वहां 2021 में टीएमसी ने 128 और बीजेपी ने 41 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार स्थिति पूरी तरह बदल गई है। SIR के बाद बीजेपी की सीटें दोगुनी से अधिक हो गईं, जबकि टीएमसी की सीटें आधी से भी कम रह गईं। इस बार बीजेपी ने इनमें से 104 और टीएमसी ने 63 सीटों पर जीत हासिल की है।
कम वोट कटने वाली सीटों पर बीजेपी का लाभ
जिन सीटों पर 25 हजार से कम वोट कटे, वहां भी बीजेपी को फायदा हुआ। ऐसी कुल 124 सीटों में से, 2021 में बीजेपी ने केवल 36 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि इस बार उसे 108 सीटों पर जीत मिली है। इसी तरह, जिन 38 सीटों पर 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के कारण सबसे अधिक वोट कटे, 2021 में उनमें से 34 पर टीएमसी ने जीत हासिल की थी, जबकि इस बार टीएमसी केवल 16 सीटों पर जीत पाई है।
वोट कटने के प्रभाव
पश्चिम बंगाल की चौरंगी में 40 प्रतिशत, जोरासांको में 38 प्रतिशत, शमशेरगंज में 36 प्रतिशत, हावड़ा उत्तर में 33 प्रतिशत और कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर 30 प्रतिशत मतदाताओं के नाम SIR में कट गए थे। इन सीटों पर मतदान में जबरदस्त वृद्धि देखी गई। 2021 की तुलना में इस बार चौरंगी में 33 प्रतिशत, जोरासांको में 36.5 प्रतिशत, शमशेरगंज में 16 प्रतिशत, हावड़ा नॉर्थ में 19.6 प्रतिशत और कोलकाता पोर्ट में 24.8 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ।
विशेष सीटों पर परिणाम
चौरंगी विधानसभा सीट पर वोट कटने के बावजूद टीएमसी ने अपनी सीट को बचाने में सफलता पाई और नयना बंदोपाध्याय ने 22 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीता। जोरासांको विधानसभा सीट पर टीएमसी 2001 से हार नहीं पाई थी, लेकिन SIR के बाद टीएमसी के विजय उपाध्याय बीजेपी के विजय ओझा से 5797 वोटों के अंतर से हार गए। शमशेरगंज सीट पर टीएमसी ने फिर से जीत हासिल की है। वहीं, हावड़ा उत्तर सीट पर लगातार जीत रही टीएमसी को बीजेपी ने 11250 वोटों के अंतर से हराया है। कोलकाता पोर्ट सीट पर टीएमसी के नेता फिरहाद हाकिम ने न केवल चुनाव जीते, बल्कि उनकी जीत का अंतर 56080 वोटों का रहा।
