पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: प्रवासी मजदूरों की घर वापसी
चुनाव की तैयारी में जुटे प्रवासी मजदूर
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव के दो चरण आयोजित होने वाले हैं। सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में रैलियां और रोड शो कर रहे हैं। इस बीच, बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर, जो विभिन्न राज्यों में काम कर रहे थे, अपने गृह जिलों की ओर लौटने लगे हैं।
प्रवासी मजदूरों की वोटिंग की इच्छा
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा विवादास्पद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान, प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों में वोटरों के नाम हटाने की दर में वृद्धि देखी गई है। ये प्रवासी मजदूर अपने नामों को वोटर लिस्ट से हटाने के खिलाफ हैं, इसलिए वे बंगाल लौटकर मतदान करने की इच्छा रखते हैं।
बंगाल लौटने वाले मजदूरों की संख्या
एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में हजारों प्रवासी मजदूर बंगाल लौट आए थे, जिनमें से कई ईद के बाद यहीं रुक गए। अब दिल्ली, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, और राजस्थान जैसे राज्यों से लोग वापस लौट रहे हैं। इनमें घरेलू कामकाजी, कूड़ा बीनने वाले, और निर्माण कार्य करने वाले शामिल हैं।
राज्य के बाहर काम कर रहे प्रवासी
राज्य सरकार के अनुसार, लगभग 36 लाख बंगाली प्रवासी राज्य के बाहर काम कर रहे हैं, जबकि अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 50 लाख तक पहुंच सकती है। हावड़ा सहित कई रेलवे स्टेशनों पर मजदूरों को बैग और पेंट की खाली बाल्टी लिए देखा जा सकता है।
वोटर कार्ड की अहमियत
मुर्शिदाबाद के लालगोला के एक प्रवासी ने बताया कि वह आठ महीने तमिलनाडु में काम करने के बाद वापस आया है। उसने कहा, 'इस बार वोट डालना बहुत जरूरी है। मेरा वोटर कार्ड ही मेरी पहचान है जब मैं बाहर काम करता हूं।'
ट्रेन में लौटने की चुनौतियां
वह मजदूर अपने आठ साथियों के साथ 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग के लिए अपने गृह जिले लौट रहा था। बीरभूम जिले के सैंथिया के जसमीर शेख ने बताया कि वे आमतौर पर ईद पर घर आते हैं, लेकिन इस बार चुनाव के कारण नहीं आ सके। ट्रेन में भीड़ होने के कारण उन्हें जुर्माना देना पड़ा, लेकिन वोट डालने के लिए लौटना जरूरी था।
