असम चुनाव से पहले हिमंता बिस्वा सरमा का बीफ पर नया बयान

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधानसभा चुनाव से पहले बीफ खाने पर नया बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि बीफ खाने पर कोई रोक नहीं है, बस इसे सार्वजनिक स्थानों पर नहीं खाना चाहिए। इस बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है, और समाजवादी पार्टी तथा आम आदमी पार्टी ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और इसके राजनीतिक निहितार्थ।
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असम चुनाव से पहले हिमंता बिस्वा सरमा का बीफ पर नया बयान

हिमंता बिस्वा सरमा का विवादास्पद बयान

कुछ समय पहले असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि वह गाय का मांस खाने वालों को नहीं छोड़ेंगे। लेकिन असम विधानसभा चुनाव के मतदान से एक दिन पहले, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बीफ खाने पर कोई पाबंदी नहीं है, बस इसे सार्वजनिक स्थानों पर नहीं खाना चाहिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने बीजेपी पर कटाक्ष किया है, जबकि आम आदमी पार्टी ने कहा है कि बीजेपी के लिए 'गोमाता' केवल एक चुनावी नारा है।


हिमंता का नया रुख

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, 'मुस्लिम समुदाय बीफ खाता है और हम उन्हें रोकते नहीं हैं। हम केवल यह कहते हैं कि इसे अपने घर में खाएं। सार्वजनिक स्थानों पर बीफ न खाएं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोगों को अपने घरों में बीफ खाने की अनुमति है, लेकिन मंदिरों के आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में इसे न खाने की सलाह दी।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ!' आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरते हुए कहा कि यह बयान बीजेपी के लिए एक चुनावी जुमला है। AAP ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'गौ मांस खाओ लेकिन घर के अंदर खाओ, हम मना नहीं कर रहे हैं।' यह बयान हिमंता बिस्वा सरमा का है, जो बीजेपी के लिए 'गौ माता' को केवल एक चुनावी मुद्दा मानते हैं।


कानूनी पहलू

हिमंता बिस्वा सरमा ने पहले कहा था कि असम में सार्वजनिक रूप से बीफ खाने पर तीन साल की जेल की सजा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो गाय का मांस खाते हैं। असम कैटल प्रिजर्वेशन एक्ट 2021 के तहत गोहत्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर बीफ खाने पर पाबंदी है।


सोशल मीडिया पर चर्चा