अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में कुशनेर की भूमिका पर सवाल
अमेरिका की शांति वार्ता में प्रमुख चेहरे
ईरान के साथ शांति समझौते के लिए अमेरिका ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर को बैठक में शामिल होने के लिए अधिकृत किया है। इस वार्ता में ईरान का प्रतिनिधित्व संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची करेंगे। कुशनेर की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि उनके पास कूटनीति का कोई अनुभव नहीं है।
पिछली वार्ता में विफलता
पिछली बार कुशनेर और स्टीव विटकॉफ वार्ता में शामिल हुए थे, लेकिन उस समय कोई सहमति नहीं बन पाई थी। कुशनेर का यहूदी समुदाय से संबंध होने के कारण अमेरिका में उनकी आलोचना होती है, और यह आरोप लगाया जाता है कि अमेरिका की विदेश नीति इजराइल के हितों के लिए काम करती है।
कुशनेर की भूमिका पर सवाल
जेडी वेंस, जो उप राष्ट्रपति हैं, युद्ध के खिलाफ हैं, इसलिए ट्रंप ने उन्हें शांति वार्ता का नेतृत्व सौंपा है। स्टीव विटकॉफ, जो ट्रंप के करीबी दोस्त हैं, मध्य पूर्व में अमेरिका के शांति दूत हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि ट्रंप ने अपने दामाद को भी इस महत्वपूर्ण वार्ता में क्यों शामिल किया है।
कुशनेर की स्थिति
हालांकि, कुशनेर का कोई आधिकारिक पद नहीं है, लेकिन फरवरी 2026 में ट्रंप ने उन्हें विशेष शांति दूत कहा था। इसके बावजूद, अमेरिका की किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर कुशनेर के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
व्यापारिक दृष्टिकोण
कुशनेर एक सफल व्यवसायी हैं और 2024 में ट्रंप की संभावित वापसी के बाद उन्होंने अपने व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया। ट्रंप की रणनीति केवल शांति समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दुश्मन देशों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने की भी कोशिश कर रहे हैं। कुशनेर का कारोबार मध्य पूर्व में केंद्रित है, और उनकी कंपनी को सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों से वित्तीय सहायता मिलती है।
