पश्चिम बर्धमान जिला: राजनीतिक इतिहास और वर्तमान स्थिति

पश्चिम बर्धमान जिला, जो पश्चिम बंगाल का एक नया जिला है, अपने औद्योगिक विकास और राजनीतिक इतिहास के लिए जाना जाता है। 2011 के बाद से तृणमूल कांग्रेस ने यहां अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि बीजेपी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है। इस लेख में, हम जिले की राजनीतिक स्थिति, विधानसभा चुनावों का इतिहास और वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा करेंगे। जानें कि कैसे ममता बनर्जी का चेहरा इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आगामी चुनावों में क्या संभावनाएं हैं।
 | 
पश्चिम बर्धमान जिला: राजनीतिक इतिहास और वर्तमान स्थिति gyanhigyan

पश्चिम बर्धमान का परिचय

पश्चिम बर्धमान जिला पश्चिम बंगाल के नवीनतम जिलों में से एक है, जिसे 7 अप्रैल, 2017 को स्थापित किया गया था। यह राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जहां कई उद्योग और खनन केंद्र हैं, जो स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं। यह जिला राज्य का 23वां जिला है और इसका नाम 24वें जैन तीर्थांकर वर्धमान के नाम पर रखा गया है। आसनसोल इस जिले का मुख्यालय है, और यहां की राजनीति भी काफी दिलचस्प है।


राजनीतिक परिदृश्य

पश्चिम बर्धमान जिला पहले वामपंथी दलों का गढ़ रहा है, लेकिन 2011 के बाद से तृणमूल कांग्रेस ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है। भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है, लेकिन वर्तमान में टीएमसी का दबदबा बना हुआ है।


जिले में दो लोकसभा सीटें हैं: आसनसोल और बर्धमान दुर्गापुर। आसनसोल से टीएमसी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा हैं, जबकि बर्धमान दुर्गापुर से कीर्ति आजाद झा सांसद हैं। विधानसभा की 9 सीटों में से 6 पर टीएमसी का कब्जा है, जबकि 3 सीटों पर बीजेपी काबिज है।


2021 के विधानसभा चुनाव

2021 में हुए विधानसभा चुनावों में, टीएमसी ने 9 में से 6 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी ने 3 सीटों पर जीत हासिल की। वाम दलों और कांग्रेस का प्रदर्शन यहां काफी कमजोर रहा। ममता बनर्जी का चेहरा इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण कारक रहा। बीजेपी ने शहरी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाई।


विधानसभा सीटों का इतिहास

पांडाबेश्वर विधानसभा 2011 में अस्तित्व में आई, जहां CPI (M) के गौरंग चटर्जी ने टीएमसी के जहीर आलम को हराया। 2016 में टीएमसी ने यह सीट जीती, और 2021 में नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने यहां से जीत दर्ज की।


दुर्गापुर पूर्व विधानसभा में 1962 में कांग्रेस ने जीत हासिल की, लेकिन बाद में CPI (M) का दबदबा रहा। 2011 में टीएमसी ने पहली बार यहां जीत दर्ज की।


रानीगंज विधानसभा में 1962 से 2006 तक केवल लेफ्ट के विधायक जीतते रहे। 2011 में टीएमसी के अली सोहराब ने जीत हासिल की।


आसनसोल विधानसभा में भी कांग्रेस और लेफ्ट का दबदबा रहा है। 2021 में अग्निमित्रा पॉल ने बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की।


जिले की स्थिति

क्षेत्रफल: 1,603 वर्ग किलोमीटर


साक्षरता दर: 78.75%


विधानसभा सीटें: 9


नगर निगम: 2


ब्लॉक: 8


ग्राम पंचायतें: 62


गांव: 316