पश्चिम बंगाल चुनाव में बुजुर्ग मतदाताओं के लिए विवादित ड्रेस कोड

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान गायघाटा विधानसभा क्षेत्र में बुजुर्ग मतदाताओं को उनके पारंपरिक लुंगी पहनने के कारण मतदान से रोका गया। इस विवाद ने स्थानीय निवासियों में नाराजगी पैदा कर दी है। कई बुजुर्गों को घर जाकर पैंट पहनने के लिए मजबूर होना पड़ा। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया।
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पश्चिम बंगाल चुनाव में बुजुर्ग मतदाताओं के लिए विवादित ड्रेस कोड gyanhigyan

गायघाटा विधानसभा सीट पर विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर 24 परगना जिले की गायघाटा विधानसभा क्षेत्र में एक अनोखा विवाद उत्पन्न हुआ। कुचुलिया गांव के कुचुलिया प्राइमरी स्कूल में एक मतदान केंद्र स्थापित किया गया था, जहां केंद्रीय सुरक्षाबलों (CAPF) ने बुजुर्ग मतदाताओं को उनके पारंपरिक पहनावे (लुंगी) के कारण मतदान करने से रोकने का मामला सामने आया है।


 


स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई बुजुर्गों को कतार से बाहर कर दिया और उनसे कहा कि वे घर जाकर पैंट पहनकर आएं, तभी उन्हें वोट डालने की अनुमति दी जाएगी। इस अनौपचारिक 'ड्रेस कोड' के कारण क्षेत्र में नाराजगी फैल गई और विवाद खड़ा हो गया।


बुजुर्ग मतदाता की घर वापसी

बुजुर्ग वोटर को लौटना पड़ा घर


इस घटना का शिकार हुए 78 वर्षीय अली मंडल ने एक समाचार पत्र से कहा, 'मैं पिछले 30 वर्षों से लुंगी पहनता आ रहा हूं और हमेशा इसी में वोट डालता आया हूं, लेकिन इस बार मुझे लाइन में खड़े-खड़े सुरक्षा बलों ने रोक दिया और कहा कि लुंगी में वोट नहीं डाल सकते। मुझे घर जाकर पैंट पहनकर आना पड़ा।' अली के पास खुद की पैंट नहीं थी, इसलिए उन्हें अपने पोते से पैंट उधार लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले कभी ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।


 


इसी तरह 80 वर्षीय गणेश मजूमदार के साथ भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने बताया, 'मैं लुंगी पहनकर वोट डालने गया था लेकिन मुझे रोक दिया गया। फिर मुझे घर लौटकर पैंट पहननी पड़ी और दोबारा आना पड़ा।'


स्थानीय लोगों की नाराजगी

ग्रामीणों में नाराजगी, उठे सवाल


स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र ग्रामीण है, जहां अधिकांश बुजुर्ग लुंगी पहनते हैं। उनका कहना है कि पहले कभी इस तरह का कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया था, इसलिए यह कार्रवाई समझ से परे है। घटना के बाद कुछ स्थानों पर विरोध भी देखने को मिला। विवाद बढ़ने के बाद यह बताया गया कि सुरक्षाकर्मियों ने यह पाबंदी हटा ली और इसके बाद लुंगी पहनकर आने वाले मतदाताओं को मतदान से नहीं रोका गया। हालांकि, इस पूरे मामले पर न तो प्रीसाइडिंग ऑफिसर और न ही CAPF की ओर से कोई आधिकारिक बयान दिया गया है।