पश्चिम बंगाल चुनाव में खाने-पीने को लेकर सियासी विवाद
खाने-पीने पर सियासी जंग
पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में अब खाद्य पदार्थों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मछली खाना चाहें, तो वह स्वयं उनके लिए इसे तैयार करेंगी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मछली और झालमुड़ी को लेकर तीखी बहस चल रही है।
BJP पर आरोप
TMC का आरोप है कि यदि BJP सत्ता में आती है, तो वह बंगाल के निवासियों के मछली, मांस और अंडा खाने पर प्रतिबंध लगा देगी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पीएम मोदी ने झारग्राम में प्रचार के दौरान एक सड़क किनारे की दुकान से झालमुड़ी खरीदी और खाई। ममता बनर्जी ने इसे केवल एक नाटक करार दिया।
झालमुड़ी पर उठे सवाल
ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के झालमुड़ी खाने की घटना पर सवाल उठाते हुए इसे दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि जो झालमुड़ी पीएम ने खाई, वह दुकानदार द्वारा नहीं बनाई गई थी। ममता ने यह भी कहा कि यह नाश्ता प्रधानमंत्री की सुरक्षा करने वाले बल (SPG) द्वारा पहले से तैयार किया गया होगा। दूसरी ओर, BJP नेता अनुराग ठाकुर ने कहा कि पीएम का छोटे दुकानदार से नाश्ता खरीदना बंगाल चुनाव के परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।
BJP का स्पष्टीकरण
BJP ने TMC के उन आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया है, जिसमें कहा गया था कि BJP खाने-पीने की आदतों पर रोक लगाएगी। BJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि बंगाल के लोग अपनी पसंद की मछली और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। अनुराग ठाकुर ने ममता बनर्जी से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने पिछले 15 वर्षों में कभी छोटे दुकानदारों की स्थिति का ध्यान रखा है?
लक्ष्मी भंडार योजना पर ममता का हमला
रैली में ममता बनर्जी ने अपनी 'लक्ष्मी भंडार' योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं को मिलने वाली सहायता को बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया है। उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि वह बंगाल के बजट से यह कर सकती हैं, तो केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं के लिए ऐसा क्यों नहीं किया? ममता ने BJP के उस वादे की भी आलोचना की, जिसमें महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये देने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने इसे चुनाव से पहले का 'झूठा वादा' बताया।
