सोने की जूलरी पर GST: जानें सही नियम और चार्ज

सोने की जूलरी खरीदते समय ग्राहकों को गोल्ड की कीमत और मेकिंग चार्ज पर GST के नियमों को समझना आवश्यक है। क्या आपको अलग-अलग GST देना चाहिए? जानें कि सरकार के नियम क्या कहते हैं और कैसे आप अतिरिक्त खर्च से बच सकते हैं। इस लेख में हम उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करेंगे कि जूलरी की कुल कीमत पर GST कैसे लागू होता है और आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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सोने की जूलरी खरीदने पर GST का नियम


जब ग्राहक सोने की जूलरी खरीदते हैं, तो उन्हें सोने की कीमत के साथ-साथ मेकिंग चार्ज भी चुकाना होता है। इसके अलावा, बिल में GST भी जोड़ा जाता है। इस संदर्भ में कई ग्राहकों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज पर अलग-अलग GST देना आवश्यक है। यदि जूलर दोनों पर अलग-अलग टैक्स लगा रहा है, तो क्या यह उचित है? सरकारी नियमों के अनुसार, तैयार जूलरी पर GST का निर्धारण एक विशेष तरीके से किया जाता है।


जूलरी की कुल कीमत पर 3% GST

सरकार के नियमों के अनुसार, जब ग्राहक दुकान से तैयार सोने, चांदी या हीरे की जूलरी खरीदते हैं, तो उनकी कुल कीमत पर 3% GST लागू होता है। इसमें सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज दोनों शामिल होते हैं।


यदि मेकिंग चार्ज को बिल में अलग से दर्शाया गया है, तो भी तैयार जूलरी पर GST की दर में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसका मतलब है कि ग्राहक को सोने की कीमत पर 3% और मेकिंग चार्ज पर अलग से 5% GST देने की आवश्यकता नहीं होती।


उदाहरण के माध्यम से समझें

मान लीजिए, आप एक सोने की चेन खरीद रहे हैं, जिसकी कीमत इस प्रकार है:



  • सोने की कीमत: ₹1,28,000

  • मेकिंग चार्ज: ₹12,000

  • कुल कीमत: ₹1,40,000


सरकार के नियमों के अनुसार, इस पूरी राशि पर 3% GST लागू होगा। इस प्रकार, ग्राहक को कुल ₹4,200 GST चुकाना होगा।


अलग-अलग GST लगाने पर अतिरिक्त खर्च

यदि जूलर सोने की कीमत पर 3% और मेकिंग चार्ज पर 5% GST लगाता है, तो टैक्स का हिसाब कुछ इस प्रकार होगा:



  • सोने की कीमत ₹1,28,000 पर 3% GST: ₹3,840

  • मेकिंग चार्ज ₹12,000 पर 5% GST: ₹600

  • कुल GST: ₹4,440


इसलिए, यदि पूरी जूलरी की कीमत पर 3% GST लगाया जाए, तो टैक्स ₹4,200 ही बनेगा। इस उदाहरण में ग्राहक को ₹240 अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।


मेकिंग चार्ज पर 5% GST का नियम

मेकिंग चार्ज पर 5% GST का नियम जूलरी निर्माण से संबंधित है। जब कोई जूलरी व्यवसायी अपना सोना किसी कारीगर को जूलरी बनाने के लिए देता है, तो कारीगर की मजदूरी या जॉब चार्ज पर 5% GST लागू हो सकता है। यह लेनदेन व्यवसायी और कारीगर के बीच होता है।


इस नियम को दुकान से तैयार जूलरी खरीदने वाले ग्राहक के GST से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। तैयार जूलरी की कुल कीमत पर 3% GST लागू होता है।


GST 2.0 के बाद भी जूलरी पर 3% टैक्स

सितंबर 2025 में GST 2.0 के तहत टैक्स स्लैब में बदलाव किए गए थे, लेकिन रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए GST की दर 3% ही बनी रही।


सोने और चांदी पर 3% GST एक जुलाई 2017 से लागू है।


जूलरी खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें

यदि आप सोने, चांदी या हीरे की तैयार जूलरी खरीद रहे हैं, तो बिल में निम्नलिखित बातों की जांच करें:



  • सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज का विवरण स्पष्ट हो।

  • तैयार जूलरी की कुल कीमत पर 3% GST का सही हिसाब लगाया गया हो।

  • मेकिंग चार्ज को अलग दिखाने के नाम पर अतिरिक्त GST तो नहीं लगाया जा रहा।

  • यदि आप अपना सोना देकर जूलरी बनवा रहे हैं या उसकी मरम्मत करा रहे हैं, तो GST का हिसाब अलग हो सकता है।