सोने का सही उपयोग: भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत कर सकता है?
सोने की खरीद पर पीएम मोदी की अपील
ग्लोबल तनाव के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने फॉरेक्स रिजर्व को सुरक्षित रखने के लिए नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। इस अपील के बाद से सोने की चर्चा तेज हो गई है। भारतीय परंपरा में सोने के गहनों का महत्व बहुत पुराना है, जिसके चलते भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 टन सोना जमा है। यह सोना कुछ घरों में और कुछ लॉकर में सुरक्षित रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय लोग अपने सोने का 2-3 प्रतिशत भी बेच दें, तो इससे अर्थव्यवस्था को काफी सहायता मिलेगी। इससे इंपोर्ट बिल में कमी आएगी और देश का रिजर्व भी सुरक्षित रहेगा।
गोल्ड का बेहतर उपयोग
भारत में सोने के प्रति लोगों का लगाव सदियों पुराना है, लेकिन अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि पहले से मौजूद सोने का बेहतर उपयोग कैसे किया जाए। इसका उद्देश्य भारत के बढ़ते इंपोर्ट बिल को कम करना और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। इसी के चलते सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। भारत, चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जो हर साल लगभग 600-800 टन सोना इंपोर्ट करता है।
सोने को प्रोडक्टिव वेल्थ में बदलना
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में बहुत सारा सोना लॉकरों में पड़ा रहता है, जिसका सही उपयोग नहीं हो पाता। महिलाओं को यह विचार करना चाहिए कि क्या वे अपने बेकार पड़े सोने को बेचकर या डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF या Sovereign Gold Bond जैसे विकल्पों में निवेश करके अधिक लाभ उठा सकती हैं।
सोने से अर्थव्यवस्था को समर्थन
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को सोना खरीदने के बजाय कुछ मुनाफा भी बुक करना चाहिए। यदि भारतीय परिवार अपने सोने का 2-4% हिस्सा भी बेच दें, तो इससे देश की गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता कम हो सकती है।
गोल्ड के विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि गोल्ड एक सुरक्षित संपत्ति है, लेकिन लंबे समय में इसके रिटर्न अन्य निवेश विकल्पों से हमेशा बेहतर नहीं होते। उदाहरण के लिए, Sukanya Samriddhi Yojana जैसी योजनाएं भी अच्छे रिटर्न देती हैं।
स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टिंग की दिशा में बदलाव
वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि अब सवाल यह नहीं है कि भारतीयों को गोल्ड रखना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि कितना गोल्ड रखना चाहिए और किस फॉर्म में। निवेशकों को इक्विटी, SIP, म्यूचुअल फंड और अन्य दीर्घकालिक निवेश विकल्पों के साथ संतुलन बनाना चाहिए।
