सीबीआई ने रिलायंस होम फाइनेंस मामले में चार्जशीट दाखिल की

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कंपनी और तीन पूर्व अधिकारियों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को धोखा देने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि ऋण को विभिन्न रिलायंस एडीए समूह की कंपनियों में डायवर्ट किया गया, जिससे बैंकों को भारी नुकसान हुआ। इस मामले में आगे की जांच जारी है, जिसमें अन्य निदेशकों और सार्वजनिक सेवकों की भूमिका का पता लगाया जाएगा।
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रिलायंस होम फाइनेंस मामले में सीबीआई की कार्रवाई


केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) के संदिग्ध ऋण डायवर्जन मामले में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में कंपनी और तीन पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का नाम शामिल है, जिन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को धोखा देने के लिए धन को डायवर्ट करने का आरोप है। सीबीआई ने 9 जुलाई, 2026 को मुंबई में विशेष न्यायाधीश के समक्ष यह चार्जशीट पेश की। इसमें RHFL के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, रविंद्र सुधालकर (कार्यकारी निदेशक और सीईओ) और कृष्णन गोपालकृष्णन अय्यर (मुख्य जोखिम अधिकारी) तथा रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी (मुख्य क्रेडिट और जोखिम अधिकारी) शामिल हैं। इन सभी पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का आरोप है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाना था।


चार्जशीट में सीबीआई की जांच के आधार पर यह खुलासा हुआ है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड द्वारा लिए गए ऋण को मध्यस्थ और संवाहक संस्थाओं के माध्यम से विभिन्न रिलायंस एडीए समूह की कंपनियों में डायवर्ट किया गया, जो कि ऐसे ऋणों के लिए निर्धारित शर्तों का उल्लंघन है। इससे उधार देने वाले बैंकों को गलत तरीके से नुकसान हुआ और आरोपियों तथा संबंधित संस्थाओं को गलत तरीके से लाभ हुआ।


इससे पहले, 7 जुलाई को सीबीआई ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) मामले में भी चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें सात आरोपियों का नाम था। इसमें रिलायंस समूह की दो कंपनियां, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) शामिल थीं। इसके अलावा, RCFL के पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का भी नाम था।


सीबीआई ने यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर दर्ज किया था। इस मामले में 13 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कुल 4,097 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आगे की जांच अन्य निदेशकों, संस्थाओं और सार्वजनिक सेवकों की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए जारी रहेगी।