सरकार ने सोने-चांदी पर सीमा शुल्क बढ़ाया, ज्वैलरी उद्योग पर पड़ेगा असर
नई सीमा शुल्क दरों का प्रभाव
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार से सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अधिसूचना संख्या 16/2026कस्टम्स के तहत लागू नई दरें आज से प्रभावी हो गई हैं। इसके अनुसार, सोने और चांदी की ज्वैलरी फाइंडिंग्स पर 5 प्रतिशत, प्लेटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 प्रतिशत और प्रीशियस मेटल स्पेंट कैटालिस्ट पर 4.35 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। इस निर्णय का ज्वैलरी उद्योग, बुलियन व्यापार और सामान्य उपभोक्ताओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
बुनियादी सीमा शुल्क में वृद्धि
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सोने और चांदी पर बुनियादी सीमा शुल्क को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही, 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर भी जोड़ा गया है। इस प्रकार, सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है।
ज्वैलरी फाइंडिंग्स और प्लेटिनम पर संशोधित शुल्क
नई अधिसूचना केवल कच्चे सोने और चांदी तक सीमित नहीं है। सरकार ने ज्वैलरी निर्माण में उपयोग होने वाले छोटे कलपुर्जों जैसे हुक, क्लैप, पिन और स्क्रू बैक पर भी शुल्क दरें निर्धारित की हैं। सोने और चांदी की फाइंडिंग्स पर 5 प्रतिशत तथा प्लेटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 प्रतिशत शुल्क लागू किया गया है। वहीं, रीसाइक्लिंग और रिकवरी उद्देश्यों से आयात होने वाले प्रीशियस मेटल स्पेंट कैटालिस्ट पर 4.35 प्रतिशत की रियायती दर रखी गई है, जो कड़े अनुपालन मानदंडों के अधीन होगी।
इस कदम का कारण
सरकार के इस निर्णय के पीछे बढ़ता व्यापार घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव मुख्य कारण माने जा रहे हैं। वित्त वर्ष 202526 में भारत का स्वर्ण आयात 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। देश का कुल व्यापार घाटा इस दौरान 333.2 बिलियन डॉलर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि गैरआवश्यक आयात को नियंत्रित करने और रुपये को समर्थन देने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक हो गया था।
बाजार और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
आयात शुल्क में वृद्धि का सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। व्यापारियों के अनुसार, ज्वैलरी निर्माताओं की उत्पादन लागत बढ़ेगी और सोने-चांदी की खरीद आम लोगों के लिए महंगी हो जाएगी। हालांकि, बुलियन व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि शुल्क में भारी वृद्धि से तस्करी और ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिल सकता है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी इस चिंता को व्यक्त किया है।
सरकार का तर्क
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। रियायती दरों के प्रावधान से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार रीसाइक्लिंग आधारित घरेलू मूल्य श्रृंखला को प्रोत्साहित करना चाहती है।
