रुपये में गिरावट: डॉलर के मुकाबले 230 पैसे की कमी
रुपये की स्थिति
हालांकि शुक्रवार को रुपये का समापन 96 के नीचे हुआ, लेकिन कारोबारी दिन के दौरान यह 96 के स्तर को पार कर गया था। पिछले पांच कारोबारी दिनों में रुपये ने औसतन 46 पैसे का नुकसान उठाया है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये में इस हफ्ते 230 पैसे यानी 2.30 रुपये की गिरावट आई है। यह एक हफ्ते में इतनी बड़ी गिरावट असामान्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली के कारण रुपये में यह गिरावट आई है। आने वाले दिनों में रुपये में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है।
रुपये में 6 प्रतिशत की गिरावट
शुक्रवार को भारतीय रुपये ने 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे गिरकर 95.81 के निचले स्तर पर समापन किया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंताओं ने रुपये पर दबाव डाला है। इस साल रुपये में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। पिछले छह कारोबारी सत्रों में, ईरान युद्ध के जोखिमों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई है।
रुपये का लाइफ टाइम लोअर लेवल
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और उच्च मूल्यांकन ने पूंजी प्रवाह पर दबाव डाला है। इसके अलावा, कमजोर शुद्ध FDI प्रवाह से भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है। इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज में, रुपये ने 95.86 पर शुरुआत की और गिरकर 96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। USD/INR जोड़ी अंततः 95.81 पर स्थिर हुई।
230 पैसे की गिरावट
पिछले पांच कारोबारी दिनों में रुपये में 230 पैसे यानी 2.30 रुपये की गिरावट आई है। 8 मई को रुपये 93.51 पर बंद हुआ था, लेकिन इस हफ्ते में लगातार गिरावट के बाद 15 मई को 95.81 पर समापन हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये में और गिरावट संभव है।
क्या रुपये 100 के स्तर को छूएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल रुपये 100 के स्तर को छू सकता है। एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, रुपये में गिरावट की संभावना है। उन्होंने कहा कि ईरान का मुद्दा लंबा चल सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि बनी रहेगी।
बाजार के आंकड़े
- डॉलर इंडेक्स 99.15 पर कारोबार कर रहा था, जो 0.34 प्रतिशत अधिक है।
- ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.14 प्रतिशत बढ़कर 109.04 USD प्रति बैरल हो गई।
- सेंसेक्स 160.73 अंक गिरकर 75,237.99 पर बंद हुआ।
- विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार खरीदार बने रहे और 1,329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
- भारत का व्यापार घाटा अप्रैल में बढ़कर 28.38 अरब डॉलर हो गया।
- अप्रैल में निर्यात 13.78 प्रतिशत बढ़कर 43.56 अरब डॉलर हो गया।
विशेषज्ञों की राय
अनुज चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और महंगाई की चिंताओं के चलते रुपये में गिरावट की संभावना है। उन्होंने कहा कि RBI के हस्तक्षेप से रुपये को सहारा मिल सकता है।
