रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 साल की सबसे बड़ी वृद्धि

रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 वर्षों में सबसे बड़ी वृद्धि की है, जो 156 पैसे की मजबूती के साथ 93.14 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप के कारण हुई है, जिसने बैंकों के लिए रुपये में नेट ओपन पोजिशन की सीमा निर्धारित की। जानें रुपये की गिरावट के पीछे के कारण और शेयर बाजार पर इसके प्रभाव के बारे में।
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रुपये की मजबूती का कारण

रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 साल की सबसे बड़ी वृद्धि

आज रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 वर्षों में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की। रुपये ने 156 पैसे की मजबूती के साथ 93.14 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप के बाद आई है। आरबीआई ने 27 मार्च, 2026 को बैंकों के लिए रुपये में नेट ओपन पोजिशन की सीमा 10 करोड़ डॉलर निर्धारित की और 10 अप्रैल तक इसका पालन अनिवार्य किया। इस कारण 10 अप्रैल तक बैंकों द्वारा डॉलर की बिक्री जारी रहने की संभावना है, जिससे रुपये में यह तेजी आई है। उल्लेखनीय है कि ईरान युद्ध के कारण रुपये में लगातार गिरावट आ रही थी।

रुपये की गिरावट का इतिहास
इससे पहले, रुपये ने सोमवार को 95 के स्तर को पार कर लिया था। शुक्रवार को यह 94.84 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि, आरबीआई द्वारा उठाए गए कई कदमों ने रुपये को समर्थन दिया। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को ऑनशोर फॉरवर्ड बाजार में गैर-वितरणीय डेरिवेटिव अनुबंध देने से भी रोका है। इसके अलावा, आरबीआई ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं होगी। इन कदमों का उद्देश्य रुपये पर सट्टा दबाव को कम करना है। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों का कहना है कि इन नियामकीय कदमों के कारण बैंकों को अपनी ओपन पोजिशन कम करने के लिए डॉलर की बिक्री करनी पड़ी, जिससे रुपये को मजबूती मिली। मंगलवार को महावीर जयंती के कारण विदेशी मुद्रा बाजार बंद रहे, जबकि बुधवार को बैंकों के वार्षिक लेखा समापन के चलते कारोबार नहीं हुआ।

डॉलर इंडेक्स में वृद्धि
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.60 प्रतिशत बढ़कर 100.05 पर पहुंच गया। इस बीच, भू-राजनीतिक परिदृश्य में लगातार बदलाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 6.84 प्रतिशत बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। ईरान युद्ध के कारण भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से रुपये की कीमत में 28 फरवरी से चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह लगभग 10 प्रतिशत कमजोर हुआ है।

घरेलू शेयर बाजार में तेजी
इस बीच, घरेलू शेयर बाजार में तेजी देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक बढ़कर 73,319.55 अंक पर और एनएसई निफ्टी 33.70 अंक बढ़कर 22,713.10 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।