मोदी सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगाया 3 रुपये का विंडफॉल टैक्स

केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लागू किया है, जबकि डीजल पर लेवी को घटाकर 16.5 रुपये कर दिया गया है। यह निर्णय वैश्विक तेल बाजार में बढ़ते संकट के बीच लिया गया है। जानें इस टैक्स के पीछे के कारण और इसके प्रभावों के बारे में।
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मोदी सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगाया 3 रुपये का विंडफॉल टैक्स gyanhigyan

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के बाद नया निर्णय

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया वृद्धि के बाद, केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शुक्रवार को, मोदी सरकार ने पहली बार पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल गेन टैक्स लागू किया है, जबकि डीजल पर लेवी को घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर 16 रुपये प्रति लीटर की लेवी लागू होगी। ये नई दरें 16 मई से प्रभावी होंगी।


मोदी सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगाया 3 रुपये का विंडफॉल टैक्स


सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि यह टैक्स केवल निर्यात होने वाले ईंधन पर लागू होगा। साथ ही, पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी समाप्त कर दिया गया है।


विंडफॉल टैक्स की परिभाषा

विंडफॉल टैक्स एक अतिरिक्त कर है, जिसे सरकार उन कंपनियों पर लगाती है जो अप्रत्याशित और सामान्य से अधिक मुनाफा कमाती हैं। यह मुनाफा किसी बाहरी घटना या अचानक बदले हालात के कारण होता है, जैसे अंतरराष्ट्रीय संकट या कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि। यह सामान्य टैक्स के अलावा लगाया जाता है।


निर्णय का कारण

फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के साथ युद्ध की शुरुआत हुई, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा। ईरान की प्रतिक्रिया ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी। सरकार का कहना है कि भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों का लाभ उठाकर बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल निर्यात कर रही थीं। इससे घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित होने और कीमतों पर दबाव बढ़ने का खतरा था। इसलिए, सरकार ने विंडफॉल टैक्स लगाया ताकि कंपनियां केवल निर्यात बढ़ाकर मुनाफा न कमाएं और देश में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध हो।


कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। इससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हो गए हैं।


पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि

सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है।