भारत में कच्चे तेल की कीमतों का ट्रांसपोर्ट पर प्रभाव

भारत में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर गहरा असर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों का कहना है कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से उनके खर्च में इजाफा होगा, जिससे मुनाफा कम हो सकता है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, डीजल की कीमत में हर 5 रुपये की वृद्धि पर मालभाड़ा दरों में 2.5% से 2.8% तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर सबसे अधिक दबाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति महंगाई को भी प्रभावित कर सकती है।
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कच्चे तेल की कीमतों का असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर

भारत में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स उद्योग पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों और ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की कीमतों में वृद्धि से उनके खर्च में काफी इजाफा होगा, जिससे मुनाफा कम हो सकता है। इसका प्रभाव आने वाले समय में मालभाड़ा और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.


हर 5 रुपये की वृद्धि पर मालभाड़ा बढ़ने की संभावना

क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि डीजल की कीमत में हर 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि होती है, तो ट्रांसपोर्टर्स को अपने मुनाफे की रक्षा के लिए मालभाड़ा दरों में लगभग 2.5% से 2.8% तक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पहले से ही दबाव में है और ईंधन की महंगाई स्थिति को और भी कठिन बना सकती है.


तेल कंपनियों पर बढ़ता वित्तीय दबाव

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इस तिमाही में कुल अंडररिकवरी लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां हर महीने भारी नुकसान उठा रही हैं, क्योंकि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है.


छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर सबसे अधिक प्रभाव

ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों का कहना है कि डीजल उनके कुल खर्च का 50% से 60% हिस्सा बनाता है। ऐसे में कीमतों में वृद्धि का सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ता है। विशेष रूप से छोटे और एक-दो ट्रक चलाने वाले ऑपरेटरों के लिए स्थिति और भी कठिन हो सकती है. एक ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर के अनुसार, बाजार में पहले से ही ट्रकों की संख्या अधिक है, जबकि माल ढुलाई की मांग कमजोर बनी हुई है.


माल ढुलाई की गति में कमी

क्रिसिल का पैनइंडिया फ्रेट इंडेक्स अप्रैल में घटकर 100.5 पर आ गया, जो मार्च में 101.4 था। इसका मतलब है कि उद्योग और माल ढुलाई दोनों की गतिविधियों में कमी आई है। इसके अलावा, FASTag लेनदेन में भी गिरावट देखी गई है। टायर, टोल टैक्स, मेंटेनेंस और ड्राइवरों की बढ़ती सैलरी ने भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर के खर्च को बढ़ा दिया है.


महंगाई पर बढ़ता दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका प्रभाव केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि से रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आ सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.