भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी
नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम का विस्तार
नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत, सरकार ने 22 नए प्रस्तावों को स्वीकृति दी है। इससे पहले इस योजना के अंतर्गत 24 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को दी गई जानकारी के अनुसार, इन नए प्रस्तावों के तहत 41,863 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे 2,58,152 करोड़ रुपये के उत्पादन की संभावना है।
इस निवेश से लगभग 34,000 नए रोजगार सृजित होंगे। विभिन्न राज्यों में, जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश, मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के निर्माण से इन उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता कम होगी।
भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी बढ़ेगी। वर्तमान में, भारत हर साल 28 अरब डॉलर से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स का आयात करता है, जिसमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) भी शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, नए प्रस्तावों के तहत मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग, टेलीकॉम कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर से संबंधित कंपोनेंट्स का निर्माण भारत में किया जाएगा।
घरेलू और विदेशी कंपनियों को इन कंपोनेंट्स के निर्माण की अनुमति दी गई है, जिसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत में मोबाइल फोन के लिए कैमरा और डिस्प्ले मोड्यूल का उत्पादन करेगी।
कंपनियां भारत में पीसीबी का निर्माण करेंगी, जैसे इंडिया सर्किट प्राइवेट लिमिटेड, वाइटल इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, सिगनम इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और बीपीएल लिमिटेड। डिजिटल एप्लीकेशंस से संबंधित लियोन सेल के निर्माण के लिए एटीएल बैट्री टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। प्रस्ताव के अनुसार, डिक्सन इलेक्ट्रोकनेक्ट भारत में आप्टिकल ट्रांससिवर का निर्माण करेगा।
उत्तर प्रदेश में एचडी पीसीबी, डिस्प्ले मोड्यूल और कैमरा मोड्यूल का निर्माण किया जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि कंपोनेंट्स के निर्माण के प्रस्ताव की मंजूरी के दौरान सभी राज्यों के विकास का ध्यान रखा गया है। इस प्रकार, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग का एक वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ेगा। वर्तमान में, मुख्य रूप से मोबाइल फोन का निर्माण भारत में किया जा रहा है।
