भारत ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लगाईं
चांदी के आयात पर सख्ती
भारत सरकार ने चांदी के आयात को नियंत्रित करने के लिए इसे प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने चांदी की सिल्वर बार के आयात के नियमों में बदलाव किया है। अब कुछ विशेष प्रकार के सिल्वर बार का विदेश से आयात करना आसान नहीं होगा। सरकार ने आयात की श्रेणी को 'फ्री' से बदलकर 'रिस्ट्रिक्टेड' कर दिया है, और यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। 99.9% या उससे अधिक शुद्धता वाले सिल्वर बार इस नए नियम के अंतर्गत आएंगे, जिसके लिए अब सरकारी मंजूरी या लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है। पहले, आरबीआई के नियमों के तहत सिल्वर बार का आयात बिना किसी कठिनाई के किया जा सकता था।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का यह कदम चांदी के आयात पर अधिक निगरानी रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। हाल ही में कीमती धातुओं पर भारी सीमा शुल्क लगाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाली वस्तुओं के आयात के लिए सरकारी लाइसेंस की आवश्यकता होती है। 13 मई को, सरकार ने कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में बताया कि सोने और प्लैटिनम के साथ मिलाई जाने वाली चांदी सहित चांदी की आयात नीति को तत्काल प्रभाव से मुक्त से प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया गया है।
चांदी का आयात बढ़ा
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि आयात शुल्क में वृद्धि का असर इस साल सोने और चांदी के आयात पर पड़ेगा, जिससे इनमें कमी आ सकती है। हालांकि, चांदी का औद्योगिक उपयोग अधिक होने के कारण इस पर शुल्क वृद्धि का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है। पिछले वित्त वर्ष में ऊंची कीमतों के कारण चांदी का आयात लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया, और मात्रा के हिसाब से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। अप्रैल में सोने और चांदी के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा तीन महीने के उच्च स्तर 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
