भारत की आर्थिक वृद्धि: वैश्विक मंदी के बीच भी तेज रफ्तार

भारत ने वैश्विक मंदी के बावजूद अपनी आर्थिक वृद्धि को बनाए रखा है, जो अन्य देशों की तुलना में अद्वितीय है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वृद्धि दर आने वाले वर्षों में भी सकारात्मक रहेगी। 2015 से 2018 के बीच भारत की जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जबकि हाल के वर्षों में चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, भारत ने 2021-22 में जोरदार वापसी की। जानें कैसे भारत की युवा जनसंख्या और घरेलू खपत ने इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना दिया है।
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भारत की आर्थिक वृद्धि: वैश्विक मंदी के बीच भी तेज रफ्तार

भारत की अद्वितीय आर्थिक प्रगति

भारत की आर्थिक वृद्धि: वैश्विक मंदी के बीच भी तेज रफ्तार


अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान जैसे देशों की तुलना में भारत की आर्थिक प्रगति की गति अद्वितीय है। कठिनाइयों के बावजूद, भारत ने अपनी आर्थिक वृद्धि को बनाए रखा है, जो वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है।


विश्व बैंक के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि की गति आने वाले वर्षों में भी सकारात्मक बनी रहेगी, भले ही अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं धीमी हो जाएं। हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वृद्धि दर 6.3% रहने की संभावना है, जबकि पहले यह 6.7% अनुमानित की गई थी। फिर भी, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।


2015 में भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त किया। यह तब संभव हुआ जब तेल की कीमतें कम थीं और सरकार ने कई सुधारों को लागू किया।


आर्थिक चुनौतियों के बावजूद वृद्धि


2015 से 2018 के बीच भारत की जीडीपी 7.5% से 8% के बीच बढ़ी, जबकि चीन की वृद्धि दर 6.5% से 6.7% तक सीमित रही। भारत ने 'मेक इन इंडिया' जैसे कार्यक्रमों को शुरू किया और एफडीआई के नियमों को सरल बनाया।


हालांकि, 2019 और 2020 में भारत को कुछ आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बैंकों और एनबीएफसी में समस्याएं आईं, जिससे जीडीपी वृद्धि दर 5% तक गिर गई।


कोरोना महामारी ने 2020 में अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुँचाया, लेकिन 2021-22 में भारत ने 8.7% की वृद्धि के साथ जोरदार वापसी की।


भविष्य की संभावनाएँ


यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। यह चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों से आगे रहेगा।


दुनिया की अर्थव्यवस्था धीमी हो रही है, लेकिन भारत की स्थिति स्थिर है। अनुमान है कि 2025 में वैश्विक अर्थव्यवस्था केवल 2.3% की दर से बढ़ेगी।


अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2025 में 1.4% की दर से बढ़ने की संभावना है, जबकि चीन की वृद्धि दर 4.5% रहने का अनुमान है।


भारत की विशेषताएँ


भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 6.3% की दर से बढ़ने की संभावना है। भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह घरेलू खपत पर अधिक निर्भर है।


भारत में युवा जनसंख्या और मध्यम वर्ग की वृद्धि से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। सरकार का बुनियादी ढांचे में निवेश भी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है।