प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की पीएम को दी मेलोडी टॉफी, जानें इसकी कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी उपहार में दी, जिससे यह टॉफी फिर से चर्चा में आ गई है। 90 के दशक में इसके विज्ञापन ने धूम मचाई थी, जिसमें पूछा जाता था, 'मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?' जानें इस टॉफी की कहानी, इसके निर्माता पारले प्रोडक्ट्स का इतिहास और इसके वित्तीय आंकड़े। यह टॉफी न केवल एक मिठाई है, बल्कि कई पीढ़ियों की यादों का हिस्सा भी है।
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मेलोडी टॉफी की यादें

90 के दशक में मेलोडी टॉफी के विज्ञापन ने टीवी पर धूम मचाई थी, जिसमें एक मजेदार सवाल पूछा जाता था—'मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?' और जवाब होता था—'मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।' यह टॉफी सभी उम्र के लोगों में लोकप्रिय रही है और आज की पीढ़ी में भी इसकी खास पहचान है। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को यह टॉफी उपहार में दी, जिससे यह फिर से चर्चा में आ गई।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें पीएम मोदी इटली दौरे के दौरान जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट देते हुए दिखाई दिए। इस वीडियो ने लोगों को उनके बचपन की यादों में डुबो दिया। चॉकलेट भरी इस टॉफी ने दशकों से भारतीयों का दिल जीता है।


मेलोडी का इतिहास

मेलोडी टॉफी को पारले प्रोडक्ट्स ने 1983 में लॉन्च किया था। यह पारले का एक प्रसिद्ध कन्फेक्शनरी ब्रांड है। इसकी नरम कैरेमल परत और चॉकलेट फिलिंग ने इसे बच्चों और बड़ों दोनों के बीच खास बना दिया। इसकी पहचान उसके स्वाद और विज्ञापनों के लिए भी रही है।


पारले प्रोडक्ट्स की कहानी

मेलोडी की निर्माता कंपनी पारले प्रोडक्ट्स की स्थापना 1929 में मुंबई के विले पार्ले में हुई थी। चौहान परिवार द्वारा स्थापित इस कंपनी ने पहले मिठाई और टॉफियां बनाई, और बाद में 1939 में बिस्किट के कारोबार में कदम रखा। आज पारले भारत की सबसे बड़ी बिस्किट और कन्फेक्शनरी कंपनियों में से एक है।


वित्तीय स्थिति

रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पारले प्रोडक्ट्स का ऑपरेशनल रेवेन्यू 8.5 फीसदी बढ़कर 15,568 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। हालांकि, कंपनी का मुनाफा लगभग 39 फीसदी घटकर 979 करोड़ रुपये रह गया है।


मेलोडी का जिंगल

मेलोडी की पहचान उसके प्रसिद्ध जिंगल 'मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ' से बनी है। यह लाइन बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई। विज्ञापन एजेंसी एवरस्ट ने इसे सबसे चॉकलेटी टॉफी के रूप में प्रस्तुत किया।


फिल्मों में मेलोडी का प्रभाव

बॉलीवुड फिल्म छिछोरे में भी इस प्रसिद्ध डायलॉग का नया अंदाज में इस्तेमाल किया गया। यह दर्शाता है कि मेलोडी सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों की यादों का हिस्सा बन चुकी है।