पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव

पश्चिम एशिया में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 29 जनवरी को अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों में संभावित वृद्धि और मुनाफावसूली जैसे कारण हैं। हालांकि, आगामी अक्षय तृतीया के अवसर पर कीमतों में तेजी की उम्मीद जताई जा रही है। जानें निवेशकों के लिए क्या सलाह दी जा रही है।
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पश्चिम एशिया में तनाव और धातुओं की कीमतें

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के चलते पश्चिम एशिया में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। यह संघर्ष एक महीने से अधिक समय से जारी है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। इस दौरान सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह परिवर्तन तब आया जब दोनों धातुओं की कीमतें पहले से ही गिरावट में थीं। 29 जनवरी 2026 को इनकी कीमतें अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे थीं। युद्ध के चलते इस गिरावट ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है, लेकिन अब इनमें कुछ तेजी की उम्मीद नजर आ रही है।

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का आंकड़ा:
29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए 1.90 लाख रुपये से अधिक थी, जबकि चांदी की कीमत प्रति किलो 4.25 लाख रुपये के पार चली गई थी।

इसके बाद, 28 फरवरी को युद्ध के दिन सोने की कीमत लगभग 1.65 लाख रुपये और चांदी की कीमत प्रति किलो करीब 2.82 लाख रुपये थी।

गुरुवार को बाजार बंद होने पर सोने की कीमत लगभग 1.49 लाख रुपये और चांदी की कीमत करीब 2.32 लाख रुपये थी। इस प्रकार, युद्ध की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में लगभग 10% और चांदी की कीमत में लगभग 18% की गिरावट आई है।​

मार्च में सोने की कीमतों में गिरावट:
मार्च का महीना सोने के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इस महीने में सोने की कीमतों में 13% से अधिक की गिरावट आई, जो 2008 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का खतरा अभी भी बना हुआ है। जब तक तेल की कीमतें अस्थिर रहेंगी, तब तक सोने पर दबाव बना रहेगा।

गिरावट के कारण:
ईरान युद्ध के बीच कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। पिछले कुछ दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव युद्ध से जुड़ी खबरों के साथ घट-बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

1. डॉलर की मजबूती:
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है।
2. ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका:
निवेशकों को लगता है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं।
3. मुनाफावसूली:
पिछले कुछ दिनों में तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर बिकवाली की है।

क्या सोने-चांदी की कीमतें बढ़ेंगी?
निवेशक अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सोने और चांदी की कीमतें कब बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही दोनों धातुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया है, और जूलर्स इस गिरावट को एक अवसर मान रहे हैं। यदि कीमतों में गिरावट का यह दौर जारी रहा, तो अक्षय तृतीया पर गहनों की मांग में वृद्धि हो सकती है।

निवेशकों के लिए सलाह:
इंडिया बुलियन एंड जूलर्स असोसिएशन (IBJA) की उपाध्यक्ष अक्षा कंबोज का कहना है कि कीमतों में यह उतार-चढ़ाव डराने वाला लग सकता है, लेकिन कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक है। वर्तमान गिरावट मुनाफावसूली के कारण है, जो एक अच्छा संकेत है।

उन्होंने यह भी कहा कि चांदी की कीमतों में अस्थिरता के कारण भारत में लोग इसे खरीदने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। निवेशकों को चांदी में एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय किश्तों में निवेश करना चाहिए। शॉर्ट टर्म में यह उतार-चढ़ाव ग्राहकों को परेशान कर सकता है, लेकिन कम दाम पर खरीदारी करने वालों के लिए यह एक अच्छा अवसर है।