ताइवान ने भारत को पीछे छोड़कर शेयर बाजार में बनाई नई पहचान
शेयर बाजारों में महत्वपूर्ण बदलाव
वर्तमान में, वैश्विक शेयर बाजारों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। एशियाई इक्विटी मार्केट के इतिहास में पहली बार, ताइवान ने बाजार पूंजीकरण के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। इस बदलाव के बाद, भारत अब छठे स्थान पर आ गया है, जबकि ताइवान दुनिया के शीर्ष 5 शेयर बाजारों में शामिल हो गया है.
ताइवान का मार्केट कैप
ताइवान का कुल मार्केट कैप अब 4.95 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जबकि भारत का मार्केट कैप 4.92 ट्रिलियन डॉलर पर स्थिर है। यह रैंकिंग अचानक नहीं बदली है; इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लोकप्रियता और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जैसे कारक शामिल हैं.
ताइवान की सफलता का कारण
ताइवान की इस सफलता का मुख्य श्रेय ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) को जाता है। इस कंपनी की हिस्सेदारी ताइवान के प्रमुख शेयर इंडेक्स में 42 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह एक कंपनी का इतना बड़ा दबदबा एक असामान्य स्थिति है। AI तकनीक में आवश्यक चिप्स के निर्माण में TSMC का लगभग एकाधिकार है, जिसके कारण इस साल इसके शेयरों में 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
भारत के शेयर बाजार की चुनौतियाँ
जब ताइवान नए रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं भारतीय बाजारों का प्रदर्शन सितंबर 2024 के बाद से कमजोर रहा है। प्रमुख इंडेक्स जैसे सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा पैसे निकालना, वैश्विक व्यापारिक तनाव और कंपनियों के कमजोर वित्तीय परिणाम जैसे कई कारण हैं.
ईरान-इजरायल विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने भी स्थिति को और खराब किया है। भारत अपनी तेल जरूरत का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा उत्पन्न हुआ है, जिसने निवेशकों का विश्वास कमजोर किया है.
वैश्विक शेयर बाजारों की स्थिति
अमेरिका अब भी शेयर बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है, जिसका मार्केट कैप 77.96 ट्रिलियन डॉलर है। इसके बाद चीन 15.57 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि जापान 8.67 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर है. हांगकांग 7.26 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ चौथे स्थान पर है.
