उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक, जानें क्या है कारण

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान पर रोक लगा दी गई है। पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने पुराने मीटरों को बदलने का कार्य तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के विरोध और मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद लिया गया। जानें इस रोक के पीछे के कारण और इसके प्रभावों के बारे में।
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स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक का आदेश

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक, जानें क्या है कारण


लखनऊ समाचार: उत्तर प्रदेश में पुराने बिजली मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का अभियान फिलहाल रोक दिया गया है। शनिवार रात, यूपी पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने आदेश दिया कि पूरे प्रदेश में पुराने मीटर बदलने का कार्य तुरंत प्रभाव से स्थगित किया जाए। यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय तकनीकी समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती।


उपभोक्ताओं को दी गई जानकारी

डॉ. आशीष गोयल ने सभी बिजली वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि तकनीकी समिति की अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी भी उपभोक्ता का पुराना मीटर नहीं बदला जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी और ये कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के माध्यम से ही दिए जाएंगे।


विरोध के कारण रोक

हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध की आवाजें उठ रही थीं। उपभोक्ताओं का आरोप था कि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने बिना सूचना या सहमति के मीटर बदल दिए। कई उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल में अचानक वृद्धि हुई है। प्रीपेड सिस्टम में बैलेंस खत्म होने पर बिना चेतावनी के बिजली कटने से लोगों में भारी नाराजगी थी।


मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में ऊर्जा विभाग के साथ एक समीक्षा बैठक की थी। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद, 12 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया गया। इस समिति का कार्य स्मार्ट मीटरों की सटीकता, बिलिंग सॉफ्टवेयर और उपभोक्ताओं की शिकायतों की तकनीकी जांच करना है।


स्मार्ट मीटरों की संख्या

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 70.50 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं। पावर कॉरपोरेशन का लक्ष्य पूरे प्रदेश को प्रीपेड सिस्टम पर लाना है, लेकिन तकनीकी बाधाओं और जनता के विरोध ने इस प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।


पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा उनकी प्राथमिकता है। अब प्रदेश की जनता को तकनीकी समिति की रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके आधार पर यह तय होगा कि यूपी में स्मार्ट मीटर अभियान कैसे आगे बढ़ेगा।