इंदौर के गांव में सस्टेनेबिलिटी का अनोखा उदाहरण

इंदौर के निकट सनावदिया गांव में जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सस्टेनेबिलिटी को व्यावहारिकता में बदलता है। डॉ. जनक पलटा मगिलिगन के नेतृत्व में, यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। हाल ही में, टेरी स्कूल के छात्रों ने इस सेंटर का दौरा किया, जहां उन्होंने सौर ऊर्जा से खाना पकाने की सरलता और प्रभावशीलता का अनुभव किया। यह केंद्र यह दर्शाता है कि कैसे ग्रामीण क्षेत्र भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
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इंदौर के गांव में सस्टेनेबिलिटी का अनोखा उदाहरण

सस्टेनेबिलिटी का जीवंत मॉडल


इंदौर के पास स्थित सनावदिया गांव में जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जब सस्टेनेबिलिटी की चर्चा हर जगह हो रही है, लेकिन व्यावहारिक उदाहरणों की कमी है।


हाल ही में, दिल्ली के टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के एम.टेक (रिन्यूएबल एनर्जी इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट) के छात्रों ने इस सेंटर का दौरा किया। यह केंद्र, डॉ. जनक पलटा मगिलिगन द्वारा संचालित है, जो सस्टेनेबल जीवनशैली को सरल और प्रभावी बनाने का एक अनूठा मॉडल पेश करता है।


डॉ. जनक पलटा मगिलिगन, एक समर्पित समाजसेविका और शिक्षिका, ने पिछले चार दशकों में ग्रामीण और आदिवासी समुदायों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे बरली डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट फॉर रूरल वीमेन की संस्थापक भी हैं, जहां हजारों महिलाओं को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया गया।


यह सेंटर, डॉ. मगिलिगन का निवास 'गिरिदर्शन' है, जिसे अब पूरी तरह से सस्टेनेबल जीवनशैली का प्रदर्शन केंद्र बना दिया गया है। यहां सभी चीजें पर्यावरण के अनुकूल हैं, जैसे सौर ऊर्जा से चलने वाली रसोई, 2 किलोवाट की हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी प्रणाली, जल प्रबंधन, जैविक खेती, जीरो वेस्ट प्रक्रियाएं और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग। अब तक, सेंटर ने 1,86,350 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया है।


छात्रों को 'हैंड्स-ऑन लर्निंग' का अनुभव मिला, जिससे उन्हें सौर ऊर्जा से खाना पकाने की सरलता और प्रभावशीलता का अनुभव हुआ। उन्होंने देखा कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट महंगा या कठिन नहीं है, बल्कि यह दैनिक जीवन के छोटे-छोटे निर्णयों से संभव है।


यह सेंटर विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर देता है। सोलर कुकिंग अपनाने से महिलाओं की LPG पर निर्भरता कम होती है, घरेलू वायु प्रदूषण घटता है और वे स्वच्छ ऊर्जा आधारित छोटे उद्यमों से अतिरिक्त आय भी कमा सकती हैं।


डॉ. जनक पलटा मगिलिगन का एक प्रसिद्ध कथन इस सेंटर की भावना को दर्शाता है—“हम कैसे मरेंगे, यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हम कैसे जीएंगे, यह हमारे हाथ में है।”


इस दौरे पर रिपोर्ट तैयार करने वाली छात्रा प्रेषिता दिग्हे ने कहा कि यह अनुभव केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाला था। छात्रों ने समझा कि सच्ची स्थिरता केवल किताबों में नहीं, बल्कि जीने का एक व्यावहारिक तरीका है।


यह सेंटर यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्र, भले ही मुख्य बिजली ग्रिड से दूर हों, विकेंद्रित स्वच्छ ऊर्जा समाधानों से आत्मनिर्भर बन सकते हैं, जो भारत के 'नेट जीरो' लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।