AI ट्रेड में सुस्ती: भारत से विदेशी निवेशकों का आउटफ्लो कम हो रहा है

ग्लोबल बाजारों में AI ट्रेड में सुस्ती के संकेत मिल रहे हैं, जहां भारत से विदेशी निवेशकों का आउटफ्लो कम हो रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों पर दबाव बढ़ा है, जबकि भारत में स्थिति में सुधार हो रहा है। जानें इस बदलाव के पीछे के कारण और क्या यह भारतीय बाजार के लिए राहत का संकेत है।
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AI ट्रेड में बदलाव के संकेत

ग्लोबल बाजारों में पिछले एक वर्ष से सक्रिय AI ट्रेड अब सुस्त पड़ता नजर आ रहा है। विदेशी निवेशकों ने पहले एशियाई बाजारों, विशेषकर दक्षिण कोरिया और ताइवान में AI से संबंधित निवेश बढ़ाया था, जबकि भारत से लगातार पूंजी निकासी हो रही थी। अब इस प्रवृत्ति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म एलारा सिक्योरिटीज के अनुसार, भारत से विदेशी निवेशकों का आउटफ्लो धीरे-धीरे घट रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया, ताइवान और ब्राजील जैसे बाजारों पर दबाव बढ़ने लगा है.


विदेशी निवेशकों की निकासी का आंकड़ा

रिपोर्ट के अनुसार, उभरते बाजारों से लगातार छठे सप्ताह विदेशी निवेशकों की निकासी हुई है। इस सप्ताह लगभग 8 अरब डॉलर का आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि पिछले 15 हफ्तों में कुल 24.4 अरब डॉलर निकाले गए हैं। सबसे अधिक दबाव चीन-केंद्रित घरेलू फंड्स पर है, जहां अप्रैल 2026 से अब तक लगभग 79 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी है। ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (GEM) फंड्स में भी कमजोरी देखी जा रही है, जिसमें लगातार तीसरे सप्ताह 738 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो हुआ है।


बिकवाली का दबाव

एलारा का कहना है कि बिकवाली का सबसे अधिक दबाव एक्टिव लॉन्ग-ओनली फंड्स में है, जबकि ETF फ्लो अभी भी हल्का सकारात्मक बना हुआ है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हो रही है, लेकिन पैसिव निवेश अभी भी बाजार में बना हुआ है।


दक्षिण कोरिया में बिकवाली

हालांकि, अब यह प्रवृत्ति बदलती दिख रही है। दक्षिण कोरिया में तीन सप्ताह पहले रिकॉर्ड 1.3 अरब डॉलर का आउटफ्लो हुआ था, जबकि इस सप्ताह भी 587 मिलियन डॉलर निकाले गए। ताइवान में निवेश की गति धीमी हो गई है और ब्राजील में दिसंबर 2024 के बाद सबसे बड़ा 230 मिलियन डॉलर का आउटफ्लो दर्ज किया गया।


भारत के लिए राहत

भारत के लिए यह राहत की बात है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली अब कम होती नजर आ रही है। मई में भारत-केंद्रित फंड्स से 702 मिलियन डॉलर की निकासी हुई, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 1.5 अरब डॉलर और मार्च में रिकॉर्ड 3.5 अरब डॉलर था। पिछले दो हफ्तों में भारत-केंद्रित फंड्स में स्थिरता भी देखने को मिली है.


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