भारत में नए लेबर कोड्स: सैलरी और ग्रेच्युटी में बदलाव
नए लेबर कोड्स का प्रभाव
भारत में नौकरीपेशा लोगों की सैलरी, पीएफ और ग्रेच्युटी को लेकर लंबे समय से चल रहे भ्रम को अब सरकार ने सुलझाने का प्रयास किया है। श्रम मंत्रालय ने नए लेबर कोड्स के तहत ड्राफ्ट नियम और संबंधित प्रश्नोत्तर जारी किए हैं। इन नियमों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में सैलरी का निर्धारण कैसे होगा, वेतन की परिभाषा क्या होगी और ग्रेच्युटी की गणना किस आधार पर की जाएगी।
सैलरी की नई परिभाषा
भारत में विभिन्न श्रम कानूनों के तहत सैलरी की परिभाषा भिन्न-भिन्न थी। नए लेबर कोड्स के तहत पहली बार सभी के लिए एक समान सैलरी परिभाषा निर्धारित की गई है। इससे कर्मचारियों को अधिक सामाजिक सुरक्षा मिलेगी और भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।
सैलरी में शामिल होने वाली चीजें
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सैलरी में मुख्य रूप से बेसिक पे, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग अलाउंस शामिल होंगे। एक महत्वपूर्ण नियम, जिसे 50 प्रतिशत नियम कहा जाता है, के अनुसार किसी भी कर्मचारी की कुल सैलरी में अलाउंस का हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।
कंपनियों की जिम्मेदारी
कई कंपनियां जानबूझकर बेसिक सैलरी कम रखती थीं ताकि पीएफ और ग्रेच्युटी का बोझ कम हो सके। नए नियमों के लागू होने के बाद यह प्रक्रिया कठिन हो जाएगी, जिससे कर्मचारियों के हित में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ग्रेच्युटी के नए नियम
ग्रेच्युटी की गणना अब केवल बेसिक सैलरी पर नहीं, बल्कि अंतिम वेतन के आधार पर होगी। यह नियम 21 नवंबर 2025 से लागू होगा, जिसका मतलब है कि इस तारीख के बाद नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को नए नियमों के तहत ग्रेच्युटी मिलेगी।
फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए राहत
फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब उन्हें ग्रेच्युटी के लिए पांच साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक साल की सेवा के बाद ही उन्हें ग्रेच्युटी का हक मिलेगा।
ओवरटाइम के नियम
ओवरटाइम के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं। यदि कोई कर्मचारी हफ्ते में 48 घंटे से अधिक काम करता है, तो उसे डबल मजदूरी दी जाएगी। इसके अलावा, लंबे समय तक बिना ब्रेक काम नहीं कराया जा सकेगा।
निष्कर्ष
नए लेबर कोड्स का उद्देश्य सैलरी प्रणाली को पारदर्शी बनाना है। हालांकि, शुरुआत में टेक-होम सैलरी में ज्यादा बदलाव नहीं दिखेगा, लेकिन लंबे समय में पीएफ, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट बेनिफिट्स में सुधार होगा।
