भारत के लेदर और फुटवियर उद्योग पर वेस्ट एशिया संकट का प्रभाव
भारत के लेदर और फुटवियर उद्योग पर संकट
मिडिल ईस्ट, जिसे वेस्ट एशिया भी कहा जाता है, में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के लेदर और फुटवियर उद्योग पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कच्चे माल की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि हुई है, जिससे उद्योग की लागत में इजाफा हुआ है और मुनाफा घटने लगा है। इस स्थिति के चलते उद्योग ने सरकार से तात्कालिक राहत की मांग की है।
कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सिंथेटिक लेदर, केमिकल्स, मशीनरी और अन्य आवश्यक इनपुट्स की कीमतों में 40 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका मुख्य कारण वेस्ट एशिया में चल रहा संकट है, जिसने तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है। चूंकि इन उत्पादों में कई सामग्री पेट्रोलियम आधारित होती हैं, इसलिए लागत में तेजी आई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा डालने से तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह मार्ग विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इसके बाधित होने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई और कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई। इस बढ़ती लागत से परेशान उद्योग ने सरकार से आयात शुल्क में छूट देने की मांग की है। उद्योग चाहता है कि सिंथेटिक लेदर, मेटल एक्सेसरीज, थ्रेड्स, मोल्ड्स, मशीनरी और पैकेजिंग सामग्री जैसे आवश्यक इनपुट्स पर ड्यूटी कम या समाप्त की जाए, ताकि लागत को नियंत्रित किया जा सके।
FLOAT स्कीम की मांग
उद्योग ने सरकार से फुटवियर एंड लेदर ओरिएंटेड ट्रांसफॉर्मेशन स्कीम को जल्द लागू करने की भी अपील की है। इस योजना के माध्यम से पूरे सेक्टर को समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
निर्यात पर प्रभाव
महंगी लागत का असर निर्यात पर भी पड़ रहा है। वर्ष 2025-26 में लेदर और लेदर उत्पादों का निर्यात थोड़ा घटा है। हालांकि, उद्योग को उम्मीद है कि नॉनलेदर उत्पादों के आंकड़े जुड़ने के बाद कुल निर्यात में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो उद्योग को और नुकसान हो सकता है। ऐसे में सरकार के लिए आवश्यक है कि वह समय रहते कदम उठाए, ताकि उद्योग को राहत मिल सके और रोजगार पर असर न पड़े.
