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कानपुर में डिवी तुलसानी और नितिन जशनानी ने जीता पुरुष युगल 19+ ओपन खिताब

डिवी तुलसानी और नितिन जशनानी ने कानपुर में आयोजित पिकलस्पिन पीडब्ल्यूआर 50 कप में पुरुष युगल 19+ ओपन खिताब जीतकर सभी को प्रभावित किया। फाइनल में उन्होंने कैतान्य कोहली और यश त्रिवेदी को हराया। इस लेख में जानें उनके शानदार प्रदर्शन और टूर्नामेंट की अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।
 

खिताब की जीत


डिवी तुलसानी और नितिन जशनानी ने 1 मार्च को कानपुर में आयोजित पिकलस्पिन पीडब्ल्यूआर 50 कप के फाइनल में कैतान्य कोहली और यश त्रिवेदी को 11-7, 11-2 से हराकर पुरुष युगल 19+ ओपन खिताब अपने नाम किया। यह टूर्नामेंट भारतीय पिकलबॉल संघ द्वारा मान्यता प्राप्त था और शहर के लिए इस सीजन का एक महत्वपूर्ण आयोजन था। डिवी और नितिन ने ग्रुप चरण में केवल एक मैच हारकर नॉकआउट स्टेज में प्रवेश किया। फाइनल में उन्होंने अपनी श्रेष्ठता को बनाए रखा और शानदार प्रदर्शन किया।


फाइनल में डिवी और नितिन ने शुरुआत से ही नियंत्रण स्थापित किया। उन्होंने बेसलाइन से खेल की गति को नियंत्रित किया और रैलियों को छोटा रखा, जिससे उनके प्रतिद्वंद्वियों से गलतियाँ करवाईं। पहले गेम का स्कोर 11-7 रहा, जबकि दूसरा गेम 11-2 के अधिक एकतरफा परिणाम के साथ समाप्त हुआ। उनकी सीधी गेम जीत ने पूरे मुकाबले में उनके नियंत्रण को दर्शाया।


दिन की शुरुआत में, डिवी और नितिन ने सेमीफाइनल में आयुष बंसल और वरुण भार्गव को 11-7, 11-3 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। दूसरी ओर, कैतान्य और यश ने सिद्धांत गुप्ता और विमान्यु अग्रवाल को 11-3, 13-15 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।


ग्रुप स्टेज में, डिवी और नितिन को ग्रुप 3 में रखा गया था। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत अनिकेत अग्रवाल और निश्चय खिलवानी के खिलाफ की। इसके बाद उन्होंने ग्रुप स्टेज में कैतान्य और यश का सामना किया और 4-11, 11-6, 11-5 से जीत हासिल की, जिससे उन्हें नॉकआउट में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला।


कैतान्य और यश ने भी शुरुआती राउंड में अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने अनिकेत अग्रवाल और निश्चय खिलवानी के खिलाफ 11-2 से जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने किनशुक दीक्षित और श्रीyansh त्रिपाठी के खिलाफ 11-2, 11-0 से जीत दर्ज की।


हालांकि, फाइनल में डिवी और नितिन ने अपनी ताकत साबित की। उनकी निरंतरता और नियंत्रण ने उन्हें पुरुष युगल 19+ ओपन खिताब दिलाया, जबकि कैतान्य और यश को प्रतिस्पर्धात्मक अभियान के बाद उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा।