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कपिल देव का 67वां जन्मदिन: भारतीय क्रिकेट के महानायक की कहानी

कपिल देव, भारतीय क्रिकेट के एक महान ऑलराउंडर, आज अपने 67वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और कुशल गेंदबाजी ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी। जानें उनके जीवन की कुछ दिलचस्प बातें, उनकी क्रिकेट यात्रा और उपलब्धियों के बारे में।
 

कपिल देव का जन्मदिन

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर कपिल देव आज, 06 जनवरी को अपने 67वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और कुशल गेंदबाजी के माध्यम से, उन्होंने भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी। कपिल देव ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने मैदान पर उतरते ही यह विश्वास दिलाया कि भारत किसी भी परिस्थिति में मुकाबला जीत सकता है। उनकी तेज गेंदबाजी, बेखौफ शॉट्स और चेहरे पर मुस्कान ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का प्रतीक बना दिया। तीसरे विश्व कप में, कपिल देव ने अपनी कप्तानी में भारत को खिताब दिलाया। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर कपिल देव के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं...


जीत की नींव

कपिल देव के पहले मैच में भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर क्रिकेट की दुनिया को चौंका दिया था। यह जीत विशेष थी क्योंकि वेस्टइंडीज ने पहले दो विश्व कप जीते थे। इसके बाद, भारत ने ऑस्ट्रेलिया को अपने अंतिम ग्रुप मैच में हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और फिर फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर विश्व कप जीता। वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के बाद, भारत ने जिम्बाब्वे को हराया, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा।


कपिल देव की शानदार पारी

चौथे मैच में भारत का सामना जिम्बाब्वे से हुआ, जहां कपिल देव ने 175 रन की अद्भुत पारी खेली। यह वनडे में किसी भारतीय द्वारा पहला शतक था और इसे वनडे इतिहास की बेहतरीन पारियों में से एक माना जाता है। इस मैच ने भारतीय टीम के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया।


क्रिकेट करियर

कपिल देव ने 1978 में भारत के लिए अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की और 1994 में अपना अंतिम मैच खेला। उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे महान ऑलराउंडर माना जाता है। आज भी, टेस्ट क्रिकेट में 400 विकेट और 5000 रन का रिकॉर्ड केवल कपिल देव के नाम है। वह वनडे में 200 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज भी थे। इसके अलावा, उनके नाम टेस्ट में सबसे ज्यादा 434 विकेट लेने का रिकॉर्ड भी है।


अवॉर्ड और सम्मान

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, कपिल देव सितंबर 1999 से सितंबर 2000 तक भारतीय टीम के कोच रहे। उन्हें 1982 में 'पद्मश्री' और 1991 में 'पद्मभूषण' से सम्मानित किया गया। 2002 में, विस्डेन ने उन्हें 'इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी' के रूप में चुना। 2010 में, कपिल देव को आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया और 2013 में बीसीसीआई द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया।