ब्राजील का फुटबॉल संकट: पहचान और गुणवत्ता की कमी
ब्राजील की हार और फुटबॉल की पहचान
ब्राजील ने नॉर्वे के खिलाफ 2-1 से हार के साथ FIFA विश्व कप से बाहर हो गया। यह हार कागज पर एक बड़ा उलटफेर माना जाएगा, लेकिन वास्तव में यह इस बात का संकेत है कि पांच बार के चैंपियन अब पहले जैसे शक्तिशाली नहीं रहे। ब्राजील का सुनहरा युग, जो 'जोगो बोनिटो' का प्रतीक था, अब केवल एक याद बनकर रह गया है। आज का ब्राजील वही आकर्षण, भय या उत्साह नहीं जगाता।
ब्राजील की पहचान का संकट
ब्राजील की पहचान का संकट
पूर्व भारतीय कप्तान शब्बीर अली का मानना है कि ब्राजील की छवि काफी समय पहले ही धूमिल हो गई थी। उन्होंने कहा, "ब्राजील में फुटबॉल की पहचान की कमी है।" पहले, अगर ब्राजील विश्व कप से बाहर हो जाता था, तो लोग कहते थे कि टूर्नामेंट का आकर्षण चला गया। अब ऐसा महसूस नहीं होता।" पूर्व मोहन बागान फुटबॉलर और कोच संकरलाल चक्रवर्ती ने भी इसी तरह की बात की और कहा कि ब्राजील की टीम में पहले जैसी गुणवत्ता नहीं है।
क्या ब्राजील अपनी पहचान वापस पा सकता है?
क्या ब्राजील अपनी पहचान वापस पा सकता है?
कार्लो एंसेलोटी, जो फुटबॉल के सबसे सफल प्रबंधकों में से एक हैं, भी ब्राजील की विरासत को पुनर्जीवित करने में असमर्थ रहे हैं। शब्बीर ने कहा कि ब्राजील का भविष्य उसके सुपरस्टार्स के लिए मजबूत समर्थन पर निर्भर करेगा। "विनिसियस तो हैं, लेकिन एक खिलाड़ी काफी नहीं है।" चक्रवर्ती ने कहा कि ब्राजील अब उन प्रकार के फुटबॉलरों का उत्पादन नहीं कर रहा है जो उन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक टीम बनाते थे।