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लद्दाख में सोनम वांगचुक के स्कूल को प्रशासन का नोटिस, कक्षाएं बिना मंजूरी शुरू करने का आरोप

लद्दाख में सोनम वांगचुक के डेजर्ट फ्लावर स्कूल को प्रशासन ने नोटिस जारी किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्कूल ने बिना मंजूरी के कक्षाएं शुरू कीं। प्रशासन ने स्कूल की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी है, जो तब तक प्रभावी रहेगी जब तक हाईकोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं सुनाता। यह विवाद HIAL को आवंटित जमीन से जुड़ा है, जिसका आवंटन अगस्त 2025 में रद्द कर दिया गया था। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
 

सोनम वांगचुक के स्कूल पर प्रशासन की कार्रवाई


लद्दाख में शिक्षा और भूमि विवाद के चलते प्रशासन ने सोनम वांगचुक से जुड़े डेजर्ट फ्लावर स्कूल को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के अनुसार, स्कूल की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं सुनाता या प्रशासन द्वारा कोई नया आदेश जारी नहीं किया जाता।


मामले का विवरण

लेह के तहसीलदार कार्यालय ने 1 नवंबर 2026 को यह नोटिस जारी किया था, जिसे हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की सह-संस्थापक और CEO डॉ. गीतांजलि जे. आंगमो को भेजा गया। प्रशासन का कहना है कि आंगमो ने 22 सितंबर को लेह के उपायुक्त से स्कूल की प्रबंधन समिति के सदस्यों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और आवश्यक मंजूरी मांगी थी। इसके बावजूद, प्रशासन को जानकारी मिली कि स्कूल ने आवश्यक स्वीकृतियों के बिना ही कक्षाएं और अन्य गतिविधियां शुरू कर दीं।


जमीन आवंटन विवाद

इस मामले की जड़ HIAL को आवंटित 1,076 कनाल और एक मरला जमीन का विवाद है। अगस्त 2025 में लद्दाख प्रशासन ने इस जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था, जो फियांग क्षेत्र में 40 साल की लीज पर दी गई थी। प्रशासन का कहना है कि जमीन आवंटन से संबंधित शर्तों का पालन नहीं किया गया। हालांकि, सोनम वांगचुक और गीतांजलि आंगमो ने इन आरोपों का विरोध किया है, उनका कहना है कि लीज प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्होंने प्रशासन से कई बार संपर्क किया था।


हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार

डेजर्ट फ्लावर स्कूल को लेकर जारी नोटिस ने एक बार फिर जमीन विवाद को चर्चा में ला दिया है। प्रशासन ने स्कूल की गतिविधियों पर रोक लगाने और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में आगे की स्थिति हाईकोर्ट की सुनवाई और उसके आदेशों पर निर्भर करेगी। अदालत के फैसले तक स्कूल की गतिविधियों को लेकर प्रशासन का निर्देश प्रभावी रहेगा।