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एम्स भोपाल की नई खोज: मानव शरीर में मिली ट्यूबारियल ग्रंथि

एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने मानव शरीर में एक नई ग्रंथि, ट्यूबारियल ग्लैंड, की खोज की है। यह ग्रंथि नाक के पीछे और गले के ऊपरी हिस्से में स्थित है और इसे स्वतंत्र लार ग्रंथि के रूप में पहचाना गया है। इस खोज से सिर-गर्दन की सर्जरी में सटीकता बढ़ेगी और कैंसर उपचार में नई दिशा मिलेगी। शोध दल ने तीन वर्षों में 150 से अधिक शवों पर अध्ययन किया, जिससे यह खोज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर सकी। यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता को दर्शाता है और चिकित्सा विज्ञान में एक नया अध्याय खोलता है।
 

नई ग्रंथि की खोज


एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने मानव शरीर में एक नई ग्रंथि की पहचान की है, जिसे ट्यूबारियल ग्लैंड कहा गया है। यह ग्रंथि नाक के पीछे और गले के ऊपरी हिस्से में स्थित है और इसे एक स्वतंत्र लार ग्रंथि के रूप में मान्यता दी गई है।


शोध की प्रक्रिया

इस खोज के लिए एम्स भोपाल की टीम ने लगभग तीन वर्षों तक 150 से अधिक संरक्षित शवों पर गहन अध्ययन किया। इस ग्रंथि से निकलने वाली निकासी नली को भी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है। यह शोध जर्नल ऑफ एनाटॉमी में नवंबर 2025 में प्रकाशित हुआ, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।


महत्वपूर्ण लाभ

इस खोज का महत्व क्या है?



  • सिर-गर्दन की सर्जरी में सटीकता में वृद्धि होगी, जिससे डॉक्टरों को इस क्षेत्र की संरचना की बेहतर जानकारी मिलेगी।

  • कैंसर उपचार, विशेषकर रेडियोथेरेपी और हेड एंड नेक कैंसर की योजना में सुधार होगा। इस ग्रंथि को सुरक्षित रखकर साइड इफेक्ट्स को कम किया जा सकता है।

  • बीमारियों की पहचान और उपचार में नई दिशा मिलेगी, क्योंकि पहले इस क्षेत्र को पूरी तरह से समझा नहीं गया था।

  • यह दर्शाता है कि मानव शरीर की संरचना में अभी भी नई खोजें संभव हैं, भले ही सदियों से अध्ययन हो रहा हो।


शोध दल

इस शोध में डॉ. सुनीता अरविंद अथावले, डॉ. शीतल कोटगिरवार, डॉ. मनाल एम. खान, डॉ. अंशुल राय, डॉ. दीप्ती और अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। यह खोज 2020 में एक डच अध्ययन पर आधारित बहस को भी मजबूत करती है, जिसमें इस ग्रंथि का पहली बार उल्लेख किया गया था। हालांकि, एम्स भोपाल ने पहली बार इसके मैक्रोस्कोपिक और हिस्टोलॉजिकल प्रमाण प्रस्तुत किए।


भारत की वैज्ञानिक क्षमता

यह खोज चिकित्सा विज्ञान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता को उजागर करती है। एम्स भोपाल ने यह साबित किया है कि भारतीय संस्थान वैश्विक स्तर पर नई उम्मीद जगाने वाले शोध कर सकते हैं!