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उत्तराखंड में भूमि धोखाधड़ी मामलों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई

उत्तराखंड में भूमि धोखाधड़ी के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासन को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए हैं। गढ़वाल मंडल में आयोजित बैठक में 200 मामलों की समीक्षा की गई, जिसमें 40 मामलों का निस्तारण किया गया। नई व्यवस्था के तहत लैंड फ्रॉड कमेटी की जांच के बाद ही मुकदमा दर्ज होगा। हर 15 दिन में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी ताकि मामलों की प्रगति पर नजर रखी जा सके। यह कदम प्रशासन की सक्रियता और पारदर्शिता को दर्शाता है।
 

मुख्यमंत्री का निर्देश और प्रशासन की सक्रियता


उत्तराखंड में भूमि धोखाधड़ी के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई को तेज कर दिया है, जिसके तहत गढ़वाल मंडल में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।

यह बैठक देहरादून स्थित गढ़वाल आयुक्त कार्यालय में हुई, जिसकी अध्यक्षता आयुक्त विनय शंकर पांडे ने की। इस बैठक में आईजी गढ़वाल, सभी एसडीएम, तहसीलदार और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य भूमि धोखाधड़ी से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा करना और उनके शीघ्र निस्तारण के लिए ठोस योजना बनाना था।

आयुक्त ने बताया कि 2021 से अब तक गढ़वाल मंडल में भूमि धोखाधड़ी के 200 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 40 मामलों का निस्तारण इस बैठक के दौरान किया गया। उन्होंने कहा कि शेष मामलों के निस्तारण के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना तैयार की जा रही है।

वर्तमान में 7 से 8 मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है, और कई अन्य मामलों का निस्तारण एक से डेढ़ सप्ताह के भीतर होने की संभावना है। यह दर्शाता है कि प्रशासन अब इन मामलों को गंभीरता से ले रहा है।

आयुक्त ने यह भी बताया कि लैंड फ्रॉड के मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब किसी भी भूमि धोखाधड़ी के मामले में सीधे मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा, बल्कि पहले लैंड फ्रॉड कमेटी की जांच और मंजूरी अनिवार्य होगी। इसके बाद ही पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

सरकार की प्राथमिकता है कि आम जनता को भूमि से जुड़े विवादों में त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान मिले। इसके लिए हर 15 दिन में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि मामलों की प्रगति पर नजर रखी जा सके। इस नई व्यवस्था से न केवल लैंड फ्रॉड के मामलों में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और निर्दोष लोगों को कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद गढ़वाल मंडल में भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर प्रशासन ने सक्रियता बढ़ा दी है। नियमित समीक्षा और सख्त प्रक्रिया के जरिए सरकार इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए प्रतिबद्ध है।