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उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सुधार: अपंजीकृत प्रमोटरों पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गैर-पंजीकृत प्रमोटरों को अपने दायरे में शामिल किया है। यह नया संशोधन, जो 25 मार्च 2026 से लागू होगा, उन खरीदारों को न्याय प्रदान करेगा जिन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश किया था जो रेरा में पंजीकृत नहीं थे। इस निर्णय से रियल एस्टेट में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रमोटरों की जवाबदेही तय होगी। जानें इस नए नियम के प्रमुख बिंदु और इसके संभावित प्रभाव।
 

उत्तर प्रदेश रेरा का नया संशोधन


उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अब गैर-पंजीकृत प्रमोटरों को भी अपने दायरे में शामिल कर लिया है। रेरा अधिनियम 2016 की धारा 85 के तहत किए गए इस 10वें संशोधन के परिणामस्वरूप, उन हजारों खरीदारों को न्याय मिलेगा जिन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश किया था जो रेरा में पंजीकृत नहीं थे। यह नई व्यवस्था 25 मार्च 2026 से लागू हो गई है।

संशोधन के प्रमुख बिंदु:
न्याय के लिए समान मंच: अब अपंजीकृत परियोजनाओं के आवंटी भी पोर्टल पर ‘फार्म-एम’ के माध्यम से प्रतिपूर्ति (Refund), कब्जा (Possession) और अन्य राहतों के लिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। पहले केवल पंजीकृत प्रोजेक्ट्स के मामलों की ही सुनवाई होती थी। पारदर्शी प्रक्रिया: यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी के अनुसार, यदि जांच में पाया जाता है कि किसी प्रोजेक्ट का पंजीकरण अनिवार्य था और प्रमोटर ने नहीं कराया, तो प्राधिकरण सचिव को उस पर कड़ी कार्रवाई के लिए निर्देश देगा।

मनमाने शुल्क पर लगाम: प्रमोटर अब आवंटियों से मनमाना शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। आवंटी की मृत्यु पर उत्तराधिकारी के नाम संपत्ति ट्रांसफर करने के लिए अधिकतम 1,000 रुपये और परिवार के बाहर ट्रांसफर करने पर अधिकतम 25,000 रुपये ही प्रोसेसिंग फीस ली जा सकेगी। विधिक सुधार: यह कदम सुप्रीम कोर्ट की उस तल्ख टिप्पणी के बाद आया है जिसमें संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। अब एक ही बेंच के बजाय सभी बेंचों में इन मामलों की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर होगी।

फैसले से रियल एस्टेट में बढ़ेगी पारदर्शिता:
इस निर्णय से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और उन प्रमोटरों की जवाबदेही तय होगी जो पंजीकरण से बचकर ग्राहकों को ठग रहे थे। हालांकि, यूपी रेरा पर काम का बोझ बढ़ेगा क्योंकि पहले से ही 50 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगा।