शारीरिक संबंध बनाने के लिए वर्जित तिथियाँ और स्थान
शारीरिक संबंध के लिए सावधानियाँ
शारीरिक संबंध के लिए ज्योतिषीय सुझाव: विवाह संस्कार के अंतर्गत, पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति तन और मन से जुड़ जाते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि किन तिथियों, अवसरों और स्थानों पर दांपत्य जीवन में शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए।
नवरात्र के नौ दिन
नवरात्र के दौरान भक्त देवी मां की आराधना में लीन रहते हैं। इस पवित्र समय में, पति-पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि यह महापाप माना जाता है और इससे जीवन में नकारात्मकता आ सकती है।
अमावस्या तिथि
शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या के दिन पति-पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। इस दिन बुरी शक्तियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में नकारात्मकता आ सकती है।
संक्रांति के समय
संक्रांति के दिन, जब सूर्य राशि बदलता है, पति-पत्नी को संबंध नहीं बनाना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है और इससे कुंडली में सूर्य कमजोर हो सकता है।
चतुर्थी और अष्टमी तिथि
किसी भी माह की चतुर्थी और अष्टमी तिथि पर पति-पत्नी को शारीरिक संबंध से बचना चाहिए। रविवार भी इस संदर्भ में उचित नहीं माना जाता है।
श्राद्ध के दिनों में
श्राद्ध के समय, पितरों की पूजा की जाती है। इस दौरान पति-पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए, ताकि मन और तन शुद्ध रह सके।
व्रत के दौरान
व्रत के समय, व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। नवजात के पास भी शारीरिक संबंध बनाना महापाप माना जाता है।
मंदिर परिसर में
मंदिर परिसर में शारीरिक संबंध बनाना महापाप है। यह स्थान भक्ति और शांति के लिए होता है, इसलिए इस तरह का कृत्य निषेध है।
अग्नि के सामने
हिंदू धर्म में अग्नि को देवता माना जाता है। अग्नि के पास शारीरिक संबंध बनाना नकारात्मकता का कारण बन सकता है।
पवित्र नदी के किनारे
किसी पवित्र नदी के किनारे शारीरिक संबंध बनाना विध्वंसकारी माना जाता है। इससे नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।
संतान प्राप्ति के लिए सावधानी
यदि दंपती संतान प्राप्ति के लिए संबंध बनाते हैं, तो उन्हें तिथि और स्थान का ध्यान रखना चाहिए। वर्जित स्थानों पर संबंध बनाना खतरनाक हो सकता है।