विभुवन संकष्टी चतुर्थी: विशेष उपाय और महत्व
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के आध्यात्मिक लाभ
3 जून, बुधवार को ज्येष्ठ मास की विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत मनाया जाएगा। यह व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है, क्योंकि यह अधिकमास या पुरुषोत्तम मास में आती है और हर तीन साल में केवल एक बार होती है। इस दिन श्रद्धालु गणेश जी को विशेष रूप से दुर्वा चढ़ाते हैं, जिससे उन्हें गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व
इस दिन भगवान गणेश की पूजा और विशेष उपाय करने से बुद्धि, धन और ऐश्वर्य का वरदान मिलता है। अधिक मास में आने वाला यह व्रत फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर भगवान गणेश की आराधना करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। बुधवार का दिन विशेष रूप से गणेश जी को समर्पित है, जिससे इस बार की संकष्टी चतुर्थी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर किए जाने वाले उपाय
- दूर्वा और मोदक का भोग: 21 हरी दूर्वा की गांठें और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- अथर्वशीर्ष का पाठ: गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ सुबह या शाम के समय करें। इससे धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
- दान-पुण्य: 2-10 वर्ष के बच्चों को लेखन सामग्री जैसे किताब, कॉपी, पेन आदि भेंट करें। जरूरतमंदों को हरे वस्त्र, गाय को हरा चारा या गणेश मंदिर में हरी मूंग का दान करें।
- चंद्र देव को अर्घ्य: चंद्रोदय के समय जल में दूध और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और गणेश जी की आरती करें।
- धन वृद्धि यंत्र स्थापित करें: घर या दुकान पर गणेश यंत्र या धन वृद्धि यंत्र स्थापित करें और नियमित पूजा करें। यह उपाय व्यापार में आर्थिक तरक्की और कर्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है।