☰
×

रमा एकादशी: तिथि, पूजा विधि और पौराणिक कथा की जानकारी

रमा एकादशी इस वर्ष 4 और 5 नवंबर को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष अवसर है। जानें इस दिन की तिथि, पूजा विधि और पौराणिक कथा, जो इस व्रत के महत्व को दर्शाती है। इस व्रत का पालन करने से घर में सुख और समृद्धि का वास होता है।
 

रमा एकादशी का महत्व


जयपुर। इस वर्ष रमा एकादशी की तिथि 4 और 5 नवंबर को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रमा महालक्ष्मी का एक स्वरूप है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।


तिथि और पूजा का समय

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 4 नवंबर 2026 को सुबह 11:03 बजे से शुरू होगी और 5 नवंबर 2026 को सुबह 10:36 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों में उदया तिथि और द्वादशी युक्त एकादशी को व्रत के लिए शुभ माना गया है, इसलिए रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 6 नवंबर को किया जाएगा।


पूजा विधि

रमा एकादशी पर सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद गृह मंदिर में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, फल, फूल, मिष्ठान और तुलसी दल का अर्पण अनिवार्य है। संध्या में आरती के बाद एकादशी की कथा सुनने और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करने की परंपरा है।


पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाने वाला और दीपावली से पूर्व माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला माना जाता है। कथा के अनुसार, राजा मुचुकुंद की पुत्री चंद्रभागा और उनके पति शोभन की कहानी इस व्रत के प्रभाव को दर्शाती है। शोभन की मृत्यु के बाद रमा एकादशी के पुण्य से उन्हें दिव्य नगर प्राप्त हुआ। चंद्रभागा ने भी इस व्रत को श्रद्धा से किया और अपने पति को पुनः प्राप्त किया, जिससे यह व्रत श्रद्धा और अखंड सौभाग्य का प्रतीक बन गया है।