मलमास 2026: क्या यह महीना सच में अपवित्र है?
मलमास 2026: एक विशेष महीना
मलमास 2026: हिंदू धर्म में मलमास को अधिकमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। जैसे ही यह महीना शुरू होता है, मुंडन, विवाह और गृह प्रवेश जैसे कार्यों पर रोक लग जाती है। कुछ लोग इस दौरान नए कपड़े खरीदने से भी बचते हैं। इस संदर्भ में यह सवाल उठता है कि मलमास को मलिन क्यों कहा जाता है, क्या यह सच में अपवित्र महीना है? इस लेख में हम इस उलझन को सुलझाने का प्रयास करेंगे।
क्या मलमास वास्तव में अपवित्र है?
हम जानने की कोशिश करेंगे कि मलमास सच में अपवित्र है या नहीं, ज्योतिष और पौराणिक ग्रंथों के माध्यम से।
यह जानना आवश्यक है कि मलमास में जो 'मल' है, उसका अर्थ अपवित्र नहीं है। इसका अर्थ है अभाव। सौर वर्ष में 365 दिन होते हैं, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। इस प्रकार, सौर और चंद्र वर्ष में 11 दिनों का अंतर होता है। इस अंतर को मिटाने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे मलमास या अधिक मास कहा जाता है। इस महीने में सूर्य संक्रांति नहीं आती, इसलिए इसे मलमास कहा जाता है। यह महीना खगोलीय गणना को शुद्ध करने का है, न कि अपवित्रता का।
मलमास में शुभ कार्यों की कमी क्यों?
मलमास में विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। इसके लिए सूर्य और गुरु ग्रह का मजबूत होना आवश्यक है, लेकिन इस महीने में कोई संक्रांति नहीं होती। इसलिए सांसारिक शुभ कार्यों को संपन्न करने की ऊर्जा इस महीने में नहीं होती। हालांकि, आध्यात्मिक और धार्मिक कार्य इस दौरान करना शुभ माना जाता है।
मलमास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास को पहले उपहास का विषय माना जाता था। एक बार भगवान विष्णु के पास मलमास अपनी व्यथा लेकर गए, तब भगवान ने इस माह को अपना नाम पुरुषोत्तम दिया और इसे अपना स्वामित्व दिया। इसलिए इस महीने में विष्णु की उपासना करना और आध्यात्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अब आपकी कन्फ्यूजन दूर हो गई होगी कि मलमास अपवित्र नहीं है, बल्कि कुछ ज्योतिषीय कारणों से इस माह में शुभ कार्य नहीं होते। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह महीना बहुत शुभ माना जाता है।