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भानु सप्तमी: सूर्य देव की पूजा से जीवन में लाएं उजाला

भानु सप्तमी का दिन सूर्य देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन सूर्य को जल अर्पित करने से कुंडली के दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख, स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है। जानें इस दिन अर्घ्य देने की विधि और मंत्रों का जाप कैसे करें, जिससे आपके जीवन के सभी संकट समाप्त हो सकते हैं।
 

भानु सप्तमी का महत्व

हिंदू धर्म में भानु सप्तमी का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने से कुंडली में मौजूद दोष दूर हो जाते हैं। सप्तमी तिथि सूर्य देव को समर्पित होती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से भक्तों के जीवन से अंधकार मिट जाता है।


सूर्य को मजबूत करने के उपाय

यदि आप अपनी कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करना चाहते हैं और समाज में मान-सम्मान, उच्च पद, तथा अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करना चाहते हैं, तो भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्य देव को विधिपूर्वक अर्घ्य अर्पित करें। इससे आपके जीवन के सभी संकट समाप्त हो सकते हैं।


सूर्य के प्रभाव

यदि आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है, तो आपको कार्यस्थल पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, मेहनत का फल नहीं मिलता और व्यापार में रुकावटें आती हैं। जब सूर्य मजबूत होते हैं, तो व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता विकसित होती है, सरकारी नौकरी के अवसर बनते हैं और व्यापार में सही निर्णय लेने की समझ आती है।


अर्घ्य देने की विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे का उपयोग करें। स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन का प्रयोग न करें।


तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें थोड़ा लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल फूल डालें। यदि आप व्यापार में सफलता चाहते हैं, तो जल में थोड़ी मिश्री भी मिलाएं।


सूर्य देव के सामने खड़े होकर लोटे को दोनों हाथों से पकड़ें और धीरे-धीरे जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय आपकी नजर सीधे सूर्य पर नहीं, बल्कि गिरती हुई जल धारा पर होनी चाहिए।


मंत्रों का जाप

जल अर्पित करते समय ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप कम से कम 11 बार करें। अर्घ्य पूरा होने के बाद उस स्थान पर क्लॉकवाइज तीन बार परिक्रमा करें और गिरे हुए जल को अपने माथे और आंखों पर लगाएं।


पूजा के अंत में भगवान सूर्य की आरती करें। ध्यान रखें कि जल अर्पित करते समय जल की बूंदें आपके पैरों पर न पड़ें। इसके लिए आप कोई गमला या थाली रख सकते हैं या फिर उस जल को बाद में पौधों की जड़ों में डाल सकते हैं।