भगवान कृष्ण के 108 नाम और उनके अर्थ
भगवान कृष्ण के नामों की महिमा
भगवान कृष्ण के 108 नाम: हिंदू धर्म में संतान की इच्छा रखने वाली माताएं भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करती हैं। यह परंपरा विशेष रूप से उनके बाल स्वरूप बाल गोपाल की पूजा पर केंद्रित है।
गर्भवती महिलाएं अपने कमरे में भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की तस्वीर लगाती हैं, ताकि उनकी संतान भी उनके समान हो। भगवान कृष्ण के अनेक नाम हैं, जिनमें से कुछ उनके माता-पिता ने दिए और कुछ नाम उनकी गोपियों और सखियों ने।
भगवान कृष्ण के कुछ प्रमुख नाम और उनके अर्थ
1. अचला: भगवान।
2. अच्युत: अचूक प्रभु।
3. अद्भुत: अद्भुत प्रभु।
4. आदिदेव: देवताओं के स्वामी।
5. अदित्या: देवी अदिति के पुत्र।
6. अजंमा: जिनकी शक्ति असीम है।
7. अजया: जीवन और मृत्यु के विजेता।
8. अक्षरा: अविनाशी प्रभु।
9. अमृत: अमृत जैसा स्वरूप।
10. अनादिह: सर्वप्रथम।
11. आनंद सागर: कृपा करने वाले।
12. अनंता: अंतहीन देव।
13. अनंतजित: हमेशा विजयी।
14. अनया: जिनका कोई स्वामी नहीं।
15. अनिरुध्दा: जिनका अवरोध नहीं किया जा सकता।
16. अपराजीत: जिन्हें हराया नहीं जा सकता।
17. अव्युक्ता: स्पष्ट।
18. बालगोपाल: भगवान कृष्ण का बाल रूप।
19. बलि: सर्व शक्तिमान।
20. चतुर्भुज: चार भुजाओं वाले।
21. दानवेंद्रो: वरदान देने वाले।
22. दयालु: करुणा के भंडार।
23. दयानिधि: सब पर दया करने वाले।
24. देवाधिदेव: देवों के देव।
25. देवकीनंदन: देवकी के लाल।
26. देवेश: ईश्वरों के भी ईश्वर।
27. धर्माध्यक्ष: धर्म के स्वामी।
28. द्वारकाधीश: द्वारका के अधिपति।
29. गोपाल: ग्वालों के साथ खेलने वाले।
30. गोपालप्रिया: ग्वालों के प्रिय।
31. गोविंदा: गाय और प्रकृति के प्रेमी।
32. ज्ञानेश्वर: ज्ञान के भगवान।
33. हरि: प्रकृति के देवता।
34. हिरंयगर्भा: सबसे शक्तिशाली प्रजापति।
35. ऋषिकेश: सभी इंद्रियों के दाता।
36. जगद्गुरु: ब्रह्मांड के गुरु।
37. जगदिशा: सभी के रक्षक।
38. जगन्नाथ: ब्रह्मांड के ईश्वर।
39. जनार्धना: सभी को वरदान देने वाले।
40. जयंतह: सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।
41. ज्योतिरादित्या: जिनमें सूर्य की चमक है।
42. कमलनाथ: देवी लक्ष्मी के प्रभु।
43. कमलनयन: जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
44. कामसांतक: कंस का वध करने वाले।
45. कंजलोचन: जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
46. लक्ष्मीकांत: देवी लक्ष्मी के प्रभु।
47. कृष्ण: सांवले रंग वाले।
48. लोकाध्यक्ष: तीनों लोक के स्वामी।
49. मदन: प्रेम के प्रतीक।
प्रभु श्री कृष्ण का जीवन प्रेरणा से भरा हुआ है। वे शक्ति, मोह, सम्मान, प्रेम, युद्ध, विछोह और करुणा के हर रूप में अपने भक्तों को शिक्षा देते हैं। भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपने बाएं हाथ की कनिष्का ऊँगली से उठाया था, जिससे उनका नाम गिरधर पड़ा।
श्री कृष्ण
भगवान कृष्ण के अन्य नाम
51. माधव: ज्ञान के भंडार।
52. मधुसूदन: मधुदानवों का वध करने वाले।
53. महेंद्र: इन्द्र के स्वामी।
54. मनमोहन: सबका मन मोह लेने वाले।
55. मनोहर: सुंदर रूप रंग वाले।
56. मयूर: मुकुट पर मोरपंख धारण करने वाले।
57. मोहन: सभी को आकर्षित करने वाले।
58. मुरली: बांसुरी बजाने वाले।
59. मुरलीधर: मुरली धारण करने वाले।
60. मुरलीमनोहर: मुरली बजाकर मोहने वाले।
61. नंद्गोपाल: नंद बाबा के पुत्र।
62. नारायन: सबको शरण में लेने वाले।
63. निरंजन: सर्वोत्तम।
64. निर्गुण: जिनमें कोई अवगुण नहीं।
65. पद्महस्ता: जिनके हाथ कमल के समान हैं।
66. पद्मनाभ: जिनकी नाभि कमल के आकार की है।
67. परब्रह्मन: परम सत्य।
68. परमात्मा: सभी प्राणियों के प्रभु।
69. परमपुरुष: श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।
70. पार्थसार्थी: अर्जुन के सारथी।
71. प्रजापती: सभी प्राणियों के नाथ।
72. पुंण्य: निर्मल व्यक्तित्व।
73. पुर्शोत्तम: उत्तम पुरुष।
74. रविलोचन: सूर्य जिनका नेत्र है।
75. सहस्राकाश: हजार आंख वाले।
76. सहस्रजित: हजारों को जीतने वाले।
77. सहस्रपात: जिनके हजारों पैर हैं।
78. साक्षी: समस्त देवों के गवाह।
79. सनातन: जिनका कभी अंत नहीं।
80. सर्वजन: सब कुछ जानने वाले।
81. सर्वपालक: सभी का पालन करने वाले।
82. सर्वेश्वर: समस्त देवों से ऊंचे।
83. सत्यवचन: सत्य कहने वाले।
84. सत्यवत: श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।
85. शंतह: शांत भाव वाले।
86. श्रेष्ट: महान।
87. श्रीकांत: अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।
88. श्याम: जिनका रंग सांवला है।
89. श्यामसुंदर: सांवले रंग में भी सुंदर।
90. सुदर्शन: रूपवान।
91. सुमेध: सर्वज्ञानी।
92. सुरेशम: सभी जीव जंतुओं के देव।
93. स्वर्गपति: स्वर्ग के राजा।
94. त्रिविक्रमा: तीनों लोकों के विजेता।
95. उपेंद्र: इन्द्र के भाई।
96. वैकुंठनाथ: स्वर्ग के निवासी।
97. वर्धमानह: जिनका कोई आकार नहीं।
98. वासुदेव: सभी जगह विद्यमान।
99. विष्णु: भगवान विष्णु के स्वरूप।
100. विश्वदक्शिनह: निपुण और कुशल।
101. विश्वकर्मा: ब्रह्मांड के निर्माता।
102. विश्वमूर्ति: पूरे ब्रह्मांड का रूप।
103. विश्वरुपा: ब्रह्मांड हित के लिए रूप धारण करने वाले।
104. विश्वात्मा: ब्रह्मांड की आत्मा।
105. वृषपर्व: धर्म के भगवान।
106. यदवेंद्रा: यादव वंश के मुखिया।
107. योगि: प्रमुख गुरु।
108. योगिनाम्पति: योगियों के स्वामी।