तिलक लगाने के लाभ: जानें इसके पीछे के गूढ़ अर्थ
तिलक लगाने के लाभ
सनातन धर्म के अध्ययन में जितनी गहराई है, उतनी ही नई और अद्भुत जानकारी भी मिलती है। हर शुभ कार्य, पूजा या दैनिक जीवन में दोनों भौंहों के बीच तिलक लगाने की परंपरा है। हर तिलक का एक विशेष अर्थ होता है। तिलक को ललाट, हृदय, बाजू और गले पर लगाया जाता है, और इसके विभिन्न प्रकारों का अलग-अलग महत्व है। जैसे लाल चंदन, पीला चंदन, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, केसर और भस्म के तिलक के अपने-अपने अर्थ होते हैं।
ललाट पर तिलक का महत्व
योग के अनुसार, हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं, जिन्हें ऊर्जा बिंदु कहा जाता है। ये चक्र हमारी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं। दोनों भौंहों के बीच का चक्र अजना चक्र या थर्ड आई चक्र कहलाता है। इस चक्र पर तिलक लगाने से आंतरिक ज्ञान, बुद्धि और अंतर्दृष्टि में वृद्धि होती है। तिलक लगाने से यह चक्र सक्रिय होता है, जिससे जीवन में अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
तिलक बुरी ऊर्जा से भी सुरक्षा प्रदान करता है। माथे पर तिलक एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह एकाग्रता, याददाश्त और ध्यान को बढ़ाता है, क्योंकि यह मस्तिष्क का केंद्र बिंदु माना जाता है।
तिलक के प्रकार और उनके लाभ
कुमकुम से तिलक करने से शरीर में शुद्धता, ऊर्जा और आध्यात्मिकता बढ़ती है। यह शक्ति का प्रतीक है। वहीं, हल्दी से तिलक का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हल्दी का पीला रंग वृहस्पति ग्रह से जुड़ा है। हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ करते हैं और मन को भी शांति प्रदान करते हैं। चंदन की ठंडक से मन को शांति मिलती है और यह आग्नेय चक्र को सक्रिय करता है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि से संबंधित है।
शिव भक्तों के लिए त्रिपुंद्रा तिलक
तिलक लगाने के कई तरीके हैं। शिव भक्त अक्सर ललाट पर विभूति या सफेद चंदन से तीन रेखाएँ बनाते हैं और उनके बीच में गोल लाल कुमकुम लगाते हैं।
उर्ध्व पुंद्रा तिलक
वैष्णव धर्म के अनुयायी इस तिलक का अधिक उपयोग करते हैं। इसमें माथे पर चंदन से यू आकार बनाया जाता है और बीच में लाल कुमकुम से एक रेखा खींची जाती है। यह भगवान कृष्ण और प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति को दर्शाता है।