कुंजल क्रिया: पेट के लिए लाभकारी योग विधि
कुंजल क्रिया का परिचय
स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कई प्रकार की क्रियाएं की जाती हैं। आज हम एक ऐसी विशेष क्रिया के बारे में चर्चा करेंगे, जो पेट के लिए अत्यंत लाभकारी है। हम आपको कुंजल क्रिया के बारे में जानकारी देंगे।
कुंजल क्रिया के लाभ
जल नेति या कुंजल क्रिया कई बीमारियों का प्रभावी उपचार है। यह षट्कर्म का एक हिस्सा है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। नियमित रूप से कुंजल क्रिया करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और बुढ़ापे की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
कुंजल क्रिया करने की विधि
इस क्रिया को सुबह शौच के बाद करना चाहिए। पहले एक बर्तन में शुद्ध पानी को हल्का गर्म करें। फिर कागासन में बैठकर पेट भर पानी पीएं। इसके बाद, नाभि से 90 डिग्री का कोण बनाते हुए झुकें और दाएं हाथ की 2-3 अंगुलियों को जीभ के पिछले हिस्से तक ले जाएं।
अंगुली को जीभ के पिछले भाग पर तेजी से घुमाने से उल्टी होने लगेगी। जब पानी बाहर आने लगे, तो अंगुली को बाहर निकालकर पानी को बाहर निकालें। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक साफ पानी बाहर न निकल जाए। अंत में, एक गिलास गर्म पानी पीकर फिर से उल्टी करें।
कुंजल क्रिया के अन्य लाभ
इस क्रिया के नियमित अभ्यास से लिवर, ह्रदय और पेट की आंतों को लाभ मिलता है। यह वात, पित्त और कफ से संबंधित रोगों को दूर करता है। इसके अलावा, यह सर्दी, जुकाम, खांसी और दमा जैसे रोगों को भी ठीक करता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
कुंजल क्रिया करते समय ध्यान रखें कि पानी न अधिक गर्म हो और न ही अधिक ठंडा। पानी में नमक नहीं मिलाना चाहिए। इसे करते समय सही शारीरिक स्थिति बनाए रखें और आगे की ओर झुककर खड़े हों।