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करवा चौथ 2023: भद्रा के समय में सरगी का सेवन न करें, जानें पूजा का सही मुहूर्त

करवा चौथ 2023 का व्रत 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जिसमें महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं। इस साल भद्रा का समय सुबह 6:25 से 6:46 बजे तक रहेगा, जिसके दौरान सरगी का सेवन न करने की सलाह दी गई है। शाम 5:48 से 6:56 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। चंद्रमा रात 8:15 बजे के बाद निकलने की संभावना है। जानें इस विशेष दिन की सभी महत्वपूर्ण जानकारी।
 

करवा चौथ का महत्व


करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर है। इस दिन, महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत करती हैं। परंपरा के अनुसार, व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने से होती है, जिसे आमतौर पर सास अपनी बहू को देती हैं। इसमें फल, मिठाइयाँ और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इस वर्ष, करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। हालांकि, इस दिन सुबह भद्रा का समय भी है, जिसे धार्मिक दृष्टिकोण से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस विषय पर ज्योतिषाचार्य साक्षी ठाकुर ने सरगी खाने, पूजा करने और चंद्रमा के दर्शन के समय की जानकारी साझा की है.


सरगी खाने का सही समय

ज्योतिषाचार्य साक्षी ठाकुर के अनुसार, 29 अक्टूबर को सुबह 6:25 से 6:46 बजे तक भद्रा का समय रहेगा, जो लगभग 21 मिनट तक चलेगा। इस दौरान सरगी का सेवन करने से बचने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि इस समय में महिलाओं को शृंगार करने और करवा चौथ की पूजा करने से भी परहेज करना चाहिए.


करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त

साक्षी ठाकुर के अनुसार, इस साल करवा चौथ की पूजा और कथा सुनने का समय शाम को महत्वपूर्ण रहेगा। 29 अक्टूबर को शाम 5:48 से 6:56 बजे तक पूजा और कथा के लिए समय निर्धारित किया गया है। इस दौरान महिलाएं विधिपूर्वक करवा माता की पूजा कर सकती हैं और व्रत कथा सुन सकती हैं.


चंद्रमा के निकलने का समय

करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। व्रत रखने वाली महिलाएं चांद निकलने का इंतजार करती हैं और उसके दर्शन के बाद ही व्रत खोलती हैं। ज्योतिषाचार्य साक्षी ठाकुर के अनुसार, इस साल 29 अक्टूबर को रात 8:15 बजे के बाद चंद्रमा निकलने की संभावना है.


पूजा की तैयारी

चंद्रमा के दर्शन के बाद महिलाएं परंपरा के अनुसार उन्हें अर्घ्य देती हैं और अपने पतियों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। चंद्रोदय का वास्तविक समय शहर और भौगोलिक स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकता है, इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने क्षेत्र के स्थानीय समय की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए.


भद्रा के समय की सावधानियाँ

करवा चौथ के अवसर पर व्रत, पूजा और चंद्र दर्शन से जुड़ी परंपराओं का विशेष महत्व है। भद्रा के समय को लेकर बताई गई सावधानियाँ ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा की तैयारी कर सकती हैं.