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अपरा एकादशी 2026: जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व

अपरा एकादशी 2026 का विशेष महत्व है, जो ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। जानें इस एकादशी की तिथि, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में। व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस लेख में आपको अपरा एकादशी के बारे में सभी आवश्यक जानकारी मिलेगी।
 

अपरा एकादशी की तिथि 2026

अपरा एकादशी की तिथि 2026: सनातन धर्म में अपरा एकादशी का विशेष स्थान है। यह एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन की सभी कठिनाइयाँ समाप्त हो जाती हैं। पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। इसे जलक्रीड़ा एकादशी, अचला एकादशी और भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष यह एकादशी कब मनाई जाएगी।



एकादशी की तिथि 2026



  • अपरा एकादशी 13 मई 2026, बुधवार को है।

  • पारण का समय 14 मई को सुबह 05:31 AM से 08:14 AM तक रहेगा।

  • पारण तिथि पर द्वादशी समाप्त होने का समय 11:20 AM है।

  • एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 मई 2026 को 02:52 PM पर होगा।

  • एकादशी तिथि समाप्त 13 मई 2026 को 01:29 PM पर होगी।


अपरा एकादशी की पूजा विधि

पूजा विधि



  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की सफाई करें।

  • स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।

  • भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।

  • भगवान को भोग अर्पित करें।

  • अपरा एकादशी की कथा का पाठ करें।

  • इसके बाद हरि विष्णु की आरती करें।

  • शाम को तुलसी के पौधे पर घी का दीपक जलाएं।

  • रातभर भगवान का भजन-कीर्तन करें।

  • अगले दिन व्रत का पारण करने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें।


अपरा एकादशी का महत्व

महत्व


विष्णु पुराण के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत सभी एकादशियों में सर्वोत्तम माना गया है। इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी बीमारियों, दोषों और आर्थिक समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। इसके साथ ही, यह भगवान विष्णु के बैकुंठ धाम की प्राप्ति का भी मार्ग प्रशस्त करता है।