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अधिकमास की कालाष्टमी: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

अधिकमास की कालाष्टमी का व्रत 08 जून को मनाया जाएगा। यह व्रत भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। जानें इस दिन की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इसके चमत्कारी लाभ। भक्तों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन की पूजा से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और मानसिक शांति मिलती है।
 

अधिकमास कालाष्टमी का महत्व

अधिकमास कालाष्टमी: यह व्रत भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित होता है और हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष, अधिकमास की कालाष्टमी का व्रत 08 जून को आयोजित किया जाएगा।


काल भैरव की पूजा का महत्व

धर्म ग्रंथों में काल भैरव को संकटों का नाशक और तंत्र-मंत्र का देवता माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से व्रत करते हैं, उनके जीवन से सभी नकारात्मक शक्तियाँ और कष्ट दूर हो जाते हैं।


अधिकमास की कालाष्टमी का विशेष महत्व

अधिकमास की कालाष्टमी बेहद शुभ


ज्योतिषियों के अनुसार, यह कालाष्टमी विशेष होती है क्योंकि यह हर तीन साल में एक बार आती है। इस दौरान काल भैरव की पूजा का फल तीन गुना अधिक होता है।


व्रत की तिथि और समय

अधिकमास की कालाष्टमी का व्रत कब है?


पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 08 जून को सुबह 03:24 बजे से शुरू होगी और 09 जून को सुबह 03:23 बजे समाप्त होगी। इसलिए, उदया तिथि के अनुसार व्रत 08 जून को रखा जाएगा।


कालाष्टमी पूजा का समय

कालाष्टमी पूजा का समय


शास्त्रों के अनुसार, काल भैरव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। 08 जून को प्रदोष काल 6:30 बजे से शुरू होकर 7:30 बजे तक रहेगा, जिससे भक्तों को पूजा के लिए एक घंटे का समय मिलेगा।


व्रत के दौरान क्या करें?

कालाष्टमी व्रत में क्या करें?



  • व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और काले या गहरे रंग के वस्त्र पहनें।

  • भगवान भैरव की मूर्ति के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

  • उन्हें नीले फूल और काले तिल अर्पित करें।

  • इस दिन श्री काल भैरव अष्टकम या भैरव चालीसा का पाठ करें।

  • काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ खिलाएं।

  • शाम को किसी मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे दीप दान करें।


व्रत के लाभ

व्रत के चमत्कारी लाभ



  • इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।

  • मंत्र जाप और पूजा से घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

  • उपवास से मानसिक तनाव कम होता है।

  • इस दिन व्रत रखने से कुंडली में कमजोर ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है और परिवार में खुशहाली आती है।