ॐ उच्चारण के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभ
ॐ का महत्व
ॐ का चिन्ह अद्वितीय है और यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। कई आकाश गंगाएँ इसी प्रकार फैली हुई हैं। ब्रह्म का अर्थ विस्तार और फैलाव है। ओंकार ध्वनि के अनेक अर्थ हैं, जो अनादि और अनंत के साथ-साथ निर्वाण की अवस्था का भी प्रतीक है।
ॐ का उच्चारण
इस ध्वनि को ओम कहा जाता है, जिसमें 'ओ' पर विशेष जोर दिया जाता है। इसे प्रणव मंत्र भी कहा जाता है, जो अनंत है। यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है, जो निरंतर चलती रहती है। ध्यान करने वाले साधक इस ध्वनि को सुनकर शांति का अनुभव करते हैं।
स्वास्थ्य लाभ
प्रतिदिन आधे घंटे तक ऊँ का उच्चारण करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह हमारे मानसिक और भावनात्मक संतुलन को बनाए रखता है। ओंकार की ध्वनि से उत्पन्न कम्पन से तनाव कम होता है और शांति बढ़ती है।
श्री श्री रविशंकर के अनुसार, नियमित रूप से ऊँ का उच्चारण करने से गंभीर बीमारियाँ भी ठीक हो सकती हैं। एक जर्मन व्यक्ति ने इस विधि से अपनी बीमारी का सामना किया और स्वस्थ हो गया।
ॐ का त्रिदेव और त्रेलोक्य से संबंध
ॐ शब्द तीन ध्वनियों 'अ', 'उ', 'म' से मिलकर बना है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक है। यह भू, भूवः और स्वर्ग लोक का भी प्रतिनिधित्व करता है।
उच्चारण की विधि
प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार का उच्चारण करें। इसे विभिन्न आसनों में किया जा सकता है। उच्चारण की संख्या 5, 7, 10 या 21 बार हो सकती है।
आवेगों का संतुलन
प्रिय और अप्रिय शब्दों की ध्वनि से मन में विभिन्न भावनाएँ उत्पन्न होती हैं। प्रिय शब्दों की ध्वनि से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जबकि अप्रिय शब्दों से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।