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हिमाचल प्रदेश में बारिश से भूस्खलन और बाढ़ का खतरा, 108 सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुई भारी बारिश ने भूस्खलन और बाढ़ का खतरा पैदा कर दिया है। चंबा जिले में कई वाहन और मकान मलबे में दब गए हैं, जबकि 108 सड़कें बंद हो गई हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जानें इस स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 

भारी बारिश से प्रभावित क्षेत्र

शिमला, 28 जुलाई: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला सहित कई क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश हुई है। चंबा जिले में भूस्खलन के कारण गंभीर नुकसान हुआ है, जहां लगभग एक दर्जन वाहन और कई मकान मलबे में दब गए हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, सोमवार शाम को हुई भारी बारिश के चलते अचानक बाढ़ और भूस्खलन के कारण प्रदेश में कुल 108 सड़कें बंद हो गईं। इसके अलावा, 38 पेयजल योजनाएं और नौ ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं।


मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग ने मंगलवार को अगले 24 घंटों में राज्य के 12 में से सात जिलों में जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में मध्यम स्तर की बाढ़ का खतरा बताया है। प्रभावित जिलों में चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन शामिल हैं। इसके अलावा, 30 जुलाई तक और 3 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के चार से पांच जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है।


अलर्ट रंग कोड

मौसम विभाग ने मौसम संबंधी अलर्ट के लिए चार रंगों का उपयोग किया है: ग्रीन (कोई कार्रवाई की आवश्यकता नहीं), येलो (निगरानी रखें), ऑरेंज (तैयार रहें) और रेड (कार्रवाई की आवश्यकता)। 'ऑरेंज अलर्ट' का मतलब है कि संभावित बिजली कटौती और परिवहन में व्यवधान के लिए तैयार रहें। 'रेड अलर्ट' का अर्थ है कि कार्रवाई करें, क्योंकि अत्यंत खराब मौसम के कारण परिवहन और बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।


स्थानीय निवासियों की स्थिति

मौसम विभाग ने बताया कि पूरी तरह संतृप्त मिट्टी वाले क्षेत्रों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लोगों से नदियों और नालों के पास जाने से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है। चंबा जिले के भरियाड़ गांव में मौसमी नालों का रुख अचानक बदलने के कारण कई परिवारों को अपने घर खाली करने पड़े।


भूस्खलन के कारण नुकसान

भारी बारिश के चलते नाले और जल निकासी मार्ग उफान पर आ गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, उदयपुर-गोलथी-नवोदय मार्ग पर भरियाड़ के पास भूस्खलन के कारण कार, ट्रक और दोपहिया वाहनों समेत लगभग एक दर्जन वाहन मलबे में दब गए। भूस्खलन से भारी मात्रा में मलबा सड़कों और रिहायशी इलाकों में जमा हो गया।


मौसम की गतिविधियाँ

पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहा और मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। चंबा जिले के जोत में सबसे अधिक 137.8 मिलीमीटर बारिश हुई। इसके बाद नैना देवी में 118 मिमी, मुरारी देवी में 83 मिमी, और शिमला में 58.2 मिमी बारिश हुई।


पेयजल आपूर्ति पर प्रभाव

शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) ने मंगलवार को कहा कि सतलुज जल आपूर्ति परियोजना के स्टेज-2 में ट्रांसफार्मर खराब होने और अन्य जल स्रोतों में भारी गाद एवं बाढ़ के कारण शिमला में अगले कुछ दिनों तक पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। मौसम केंद्र के वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा ने बताया कि 29 जुलाई की रात से 31 जुलाई तक बारिश की गतिविधियाँ चरम पर रह सकती हैं।


मानसून के दौरान घटनाएँ

इस मानसून सीजन में 30 जून से अब तक भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं में 15 लोगों की जान जा चुकी है।